Bihar Political Analysis : गठबंधन की सरकार से समर्थन भाजपा ने वापस लिया या जेडीयू ने ? जाने समीकरण

 

 

Patna : Bihar Political Analysis बिहार (Bihar) और राजनीती (Politics) का सफर हमेशा डगमगाते रास्तों से ही गुजरा है, बिहार की कल्पना करने वाले भ्रस्टाचार और लालफ़ीताशाही में लिपटे हुए नजर आते है। बिहार राज्य की सबसे बड़ी कमजोरी, यहां होने वाले घोटाले है, जिससे चरमारती हुई राज्य की आर्थिक स्तिथि से वहां के रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में कमी लाते है।

पूर्व सीएम राबड़ी देवी के बाद बिहार की कमान संभाल रहे नितीश कुमार (Nitish Kumar) इस वक्त सुर्ख़ियों में है। वजह है गठबंधन की सरकार से समर्थन वापस लेकर नितीश कुमार का इस्तीफा देना। आज नितीश कुमार ने राबड़ी देवी के घर बचल रही विधयकों की बैठक के बाद राजभवन जा पहुंचे। वहाँ राज्यपाल फागु चौहान को मिलकर अपना इस्तीफा सौंप दिया। Bihar Political Analysis

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साल 2017 में एनडीए और जेडीयू की गठबंधन वाली सरकार में सीएम नितीश कुमार मुख्यमंत्री बनाए गए। इस कार्यकाल के दौरान उन पर लोगों द्धारा भी परेशान होकर सवाल किये गए तो एनडीए ने भी धीरे धीरे मुँह मोड़ते हुए नजर आए। लगातार चुनावी दौरों में बिहार की सूरत बदलने का वादा थप ही रह गया, और शायद ही बिहार का कोई सड़क का गड्ढा भरा।

फिलहाल जेडीयू के नितीश कुमार के इस्तीफे देने और मीडिया में खबर आते ही लोगों के बीच जमकर बहस छिड़ी हुई है की ऐसा हुआ क्यों ? क्या नितीश कुमार और पीएम मोदी के बीच संबंधों में तकरार तो नहीं आई ? तो चर्चा ऐसी भी चल रही है की अब किसके साथ वह गठबंधन बनाने वाले है ? तो इसका जवाब है जीडीयू और आरजेडी मिलकर अब गठबंधन की सरकार बिहार में चलाएंगे। इस गठबंधन वाली सरकार में भी सीएम के पद पर नितीश कुमार ही होंगे। Bihar Political Analysis

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दरअसल, बिहार में 2017 की गठबंधन वाली सरकार में नितीश कुमार कुछ समय के कार्यकाल के खुश नजर नहीं आ रहे थे। ऐसा इसीलिए था क्योंकि जिस तरह से नितीश अपनी राजनीती राज्य में करना चाहते थे, वहां एनडीए (NDA) के 77 विधायक सहमति नहीं दिखाते थे। जिससे परेशान होकर उन्होंने समस्या का हल यह निकाला की वह अब समर्थन वापस लेंगे और इस्तीफा सौंपेगे। Bihar Political Analysis

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बीजेपी का मंसूबे हुए कामयाब – Bihar Political Analysis

Bihar Political Analysis  जब कोई अपना समर्थन वापस लेता है तो ऐसा माना जाता है कि वह उनके मौजूदा पार्टी के सभी विधायकों से ऐसा निर्णय लिया गया होगा या फिर सहयोगी पार्टी के रवैया से खड़ा होकर ऐसे कदम उठाते है। लगों को लग रहा ही की इस फैसले के पीछे जेडीयू का ही हाँथ है। मगर आपको बता दें कि वास्तव में बीजेपी अपने मंसूबे में कामयाब हो रही है।

बीजेपी एक राष्ट्रीय पार्टी है जिससे उसे ऐसा लगता है कि गंठबंधन में अगली पार्टी को अपने से निचे रखता है, और जैसे ही जेडीयू लोगों के हितों के लिए कुछ करने का फैसला करती है तब तब भाजपा और उनके विधयकों ने समर्थन वापस ले लिया।

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Bihar Political Analysis  नितीश कुमार के इस्तीफे को इस तरह से भी देखा जा रहा है कि भाजपा देश के जिन हिस्सों में गठंबंधन बनाती है। वहां सहयोगी पार्टी के अच्छे काम करने पर या जनहित फैसले लेने पर सहमति नहीं जताती, जिससे सहयोगी पार्टी की छवि धूमिल करने का प्रयास रहता है।

और जहां एनडीए की सरकार नहीं है वहां कोई सरकार ना हो जैसे जम्मू और कश्मीर। बीजेपी नहीं चाहती की सहयोगी पार्टी जनता के बीच अपना वर्चस्व नहीं बना पाए, वरना गठबंधन के बिना वह चुनाव जितने की क्षमता जुटा लेंगे। नितीश कुमार के केस में भाजपा नहीं चाहती कि वह अपनी राजनीती चमका सके वरना आगामी चुनाव में नितीश बिना गठबंधन के सरकार बना लेंगे। जिसके बाद नितीश कुमार को मज़बूरी में यह कदम आज उठाना पड़ा। Bihar Political Analysis

 

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