INS VIKRANT : दो क्रिकेट मैदान के बराबर आईएनएस विक्रांत, 30 विमान हो सकेंगे तैनात, जानें क्या इसकी खासियत…

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नई दिल्ली : आईएनएस विक्रांत (INS VIKRANT), एक तैरता हुआ शहर, आज नौसेना को समर्पित कर दिया जाएगा. आईएनएस विक्रांत, भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत जो वास्तव में एक विश्व के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा. भारतीय नौसेना के टॉप अधिकारी मानते हैं कि विक्रांत के चालू होने से हिंद महासागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बढ़ेगी.

विक्रांत के फ्लाइट डेक का क्षेत्रफल ढाई हॉकी मैदानों के बराबर है, जो मोटे तौर पर 12,500 वर्ग मीटर का क्षेत्रफल है. विक्रांत में स्काई-जंप से सुसज्जित एक छोटा रनवे और एक लंबा रनवे है. इसे 2009 में बनाना शुरू किया गया था. अब 13 साल बाद ये नौसेना को मिलने जा रहा है. इसके साथ ही पीएम मोदी नौसेना के नए Ensign (निशान) का भी अनावरण करेंगे. नौसेना का नया Ensign औपनिवेशिक अतीत से दूर होगा और भारतीय मैरिटाइम हैरिटेज से परिपूर्ण होगा.

 

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एक साथ 30 विमान हो सकेंगे तैनात

IAC Vikrant (Indigenous Aircraft Carrier) में 30 एयरक्रॉफ्ट तैनात हो सकते हैं. इसके अलावा इससे मिग 29K फाइटर जेट भी उड़ान भरके एंटी-एयर, एंटी-सरफेस और लैंड अटैक में भूमिका निभा सकता है. इससे Kamov 31 हेलिकॉप्टर भी उड़ान भर सकता है. Vikrant के नौसेना में शामिल होने के बाद अब भारत उन देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास स्वदेशी विमानवाहक पोत के डिजाइन और निर्माण की क्षमता है.

 

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मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल और बहुत कुछ

बताया गया है कि पोत के भीतर 15 डेक, एक मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल, एक पूल, एक किचन और महिलाओं के लिए विशेष केबिन हैं, और ज़ाहिर है, जहाज में लड़ाकू विमानों को ले जाने, हथियार देने और पुनर्प्राप्त करने की तकनीक है. विक्रांत में 2,300 कंपार्टमेंट्स और इसको बनाने में 2,400 किलोमीटर केबल लगे हैं. जानकारी के मुताबिक़, इसमें आठ विशाल बिजली जनरेटर हैं और यह हर दिन चार लाख लीटर वॉटर जेनरेट कर सकता है.

 

 

 

 

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