CG : वन विभाग की बड़ी कार्यवाही तेंदुआ के 2 शिकारी गिरफ्तार आधा दर्जन से ज्यादा फरार

 

अनूपपुर, कोतमा, एस के मिनोचा। CG कोतमा वन परिक्षेत्र अंतर्गत मैनटोलिया बीट में तेंदुए का शव संदिग्ध परिस्थितियों में पाया गया। ए ग्रेड में शामिल तेंदुए के शिकार की संभावना के बाद वन अमले के हाथ पांव फूल गए हैं। आनन-फानन में जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई। जहां तेंदुआ की शिकार की सूचना पर एसडीओ अनूपपुर केवी सिंह मौके पर पहुंचे। तेंदुए की शिकार की आशंका व मौत के कारणों का खुलासा को लेकर डॉग स्क्वायड सीधी को भी बुलाया गया था। डॉग स्क्वायड के पहुंचने के उपरांत वनविभाग अधिकारी व स्क्वायड के सदस्यों ने स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया।

मिली जानकारी के अनुसार तेंदुए की मौत करंट लगने से हुई है। डॉग स्क्वायड की मदद से कुछ संदिग्धों को भी पकड़ा गया जिनसे पूछताछ किया जा रहा हैं। तेंदुए के अंश को जबलपुर जांच के लिए भी भेजा गया। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। तेंदुआ का पोस्टमार्टम कर शव को दफन कर दिया गया।विदित हो कि कोतमा वन क्षेत्र अंतर्गत ए ग्रेड में वर्णित जानवर तेंदुआ एवं भालू की अधिकता हैं, जिनका आए दिन शिकारियों की ओर से शिकार किया जाता है।

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बड़ी कार्यवाही दो आरोपी गिरफ्तार आधा दर्जन से अधिक अभी फरार

कोतमा वन परिक्षेत्र के मटोलिया बीट अंतर्गत तेंदुए के शिकार मामले 2 शिकारियों 32 वर्षीय दशरथ सिंह निवासी देवरी एवं 34 वर्षीय दीपक बैगा निवासी सेमरवार को वन विभाग ने गिरफ्तार कर लिया है। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। इस प्रकरण में शामिल लगभग आधा दर्जन शिकारी अभी फरार चल रहे है।

शिकारियों के ठिकानों पर वन अमल दबिश दे रहा है। वन परीक्षेत्र अधिकारी कोतमा परवेश सिंह भदौरिया ने बताया कि 2 दिनों तक लगातार जांच कार्रवाई कर परसवार, देवरी , राजबांध, मौहरी सहित अन्य ठिकानों में दबिश देते हुए दो शिकारियों को गिरफ्तार किया गया हैं। गिरफ्तार किए गए शिकारियों के कब्जे से शिकार में प्रयोग की गई सामग्री सीसी, लकड़ी की खूंटी, सब्बल एवं जीआई तार को जप्त किया गया है। एक आरोपी आदतन शिकारी है। जिस पर पूर्व में मामला दर्ज है।

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फरार शिकारी अलग- अलग जिलों के बताए जा रहे हैं । जो सुनियोजित तरीके से शिकार की योजना बना कर घटना को अंजाम देते हैं। तेंदुए के शव से कुछ दूरी पर स्टोन क्रशर हैं, जो कई माह से बंद पड़ा हैं। इस क्रेशर के लिए बिजली विभाग की ओर से डाली गई 11 केवी क्षमता की लाइन से शिकारियों ने करंट की जाल बिछाकर शिकार किया था ।

चीतल और जंगली सूअर का शिकार करने के लिए करंट बिछाए गया था। इस क्षेत्र में लगातार जंगली जानवरों का शिकार होता चला आया है जिसमें से चीतल जंगली सूअर तो खुलेआम शिकार किया जाता है साथ में वन विभाग द्वारा आरक्षित ए ग्रेट के जानवर भालू और तेंदुए का भी शिकार यहां तेजी से किया जाता है जिसमें वन अमला पूरी तरह से मूकदर्शक बना हुआ है जबकि इसकी तह तक जाने पर बड़े रैकेट का पर्दाफाश हो सकता है।

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