UP IAS VRS : उत्तरप्रदेश में बढ़ रही VRS लेकर नौकरी छोड़ने वाले IAS अफसरों की संख्या, जूथिका पाटणकर के बाद अब विकास गोठलवाल ने किया VRS के लिए आवेदन

 

Lucknow : UP IAS VRS  देश के सबसे प्रतिष्ठ सिविल सेवा आईएएस को लेकर अफसरों का रुख बदलता हुआ नजर आ रहा है। हाल में यूपी में अफसर वीआरएस के लिए आवेदन कर रहे है, जिससे प्रदेशभर में नई बहस छेड़ दी है। पिछले दिनों पहले ही 1993 बैच के आईएएस अफसर राजीव अग्रवाल ने भी वीआरएस लेकर नौकरी छोड़ दी। 2003 बैच के आईएएस अफसर विकास गोठलवाल के बाद एक और आईएएस अफसर ने वीआरएस के लिए आवेदन किया है। जिसके बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि ऐसी क्या वजह है जिससे देश की सबसे बड़ी नौकरी और प्रतिष्ठित सेवा को छोड़कर जा रहे है ?

विकास गोठलवाल से पहले केन्द्रीय सूचना आयोग में सचिव पद पर तैनात 1988 बैच की जूथिका पाटणकर ने भी वीआरएस लेकर आईएएस की नौकरी छोड़ने की इच्छा जतायी। यूपी सरकार का नियुक्ति विभाग इन आवेदनों पर विचार कर रहा है।

जो खबरें सामने आ रही हैं, उसके मुताबिक जुथिका पाटणकर ने वीआरएस के लिए व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। वहीं, विकास गोठलवाल ने स्वास्थ्यगत कारणों से वीआरएस मांगा है। स्टडी लीव पर जाने से पहले विकास सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के पद पर तैनात थे। वे सितंबर, 2021 से स्टडी लीव पर हैं।

जुथिका पाटणकर ऐसी आईएएस अफसर हैं, जिन्होंने 34 साल सेवा की, लेकिन उन्हें कलेक्टरी सिर्फ दो महीने के लिए ही मिली। सर्विस रिकॉर्ड के मुताबिक जूथिका पाटणकर अपनी पूरी सर्विस में सिर्फ दो महीने रामपुर की डीएम रहीं। जूथिका केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहीं। यूपी में उनकी अंतिम तैनाती प्रमुख सचिव राज्यपाल के रूप में रही। वे मई, 2014 से जून, 2018 तक इस पद पर तैनात रहीं।

इससे पहले सितंबर 2019 में 1993 बैच के आईएश अफसर राजीव अग्रवाल ने भी वीआरएस मांगकर नौकरी छोड़ी थी। इलाहाबाद और मुजफ्फरनगर के डीएम रह चुके राजीव अग्रवाल लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष भी रहे और लखनऊ मेट्रो शुरू करने का श्रेय राजीव अग्रवाल को ही जाता है। यूपी में वीआरएस लेकर नौकरी छोड़ने वाले अफसरों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है।

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