Latest News दुश्मनो को देखतें की मारकर खा जाते है यंहा के लोग, सिर का बना लेते है तकिया, बची हड्डियों से बनाते है आभूषण, देखेँ डराने वाली तस्वीर…

 

Shocking

नई दिल्ली, Shocking पृथ्वी पर वैसे तो कई तरह के लोग निवास करते है, और सभी अपने-अपने जाति-धर्म के अनुसार अपना जीवन व्यतीत करते है. इनमे से कई मांसाहारी होते है तो कई लोग शाकाहारी, मांसाहारी लोग शाकाहारी लोग सिर्फ हरी सब्जियों का सेवन करते है तो वही मांसाहारी लोग चिकन, अंडा, मछली, मटन के साथ कुछ अन्य जीवो का सेवन करते है, लेकिन क्या आपको पता है पृथ्वी में एक ऐसी भी जनजाति मौजूद है.

 

 

 

जो इंसानो को खा जाती है जी हाँ ऑस्ट्रेलिया (Australia) महाद्वीप में स्थित न्यू गिनी (New Guinea) में एक ऐसी खतरनाक जनजाति पाई जाती है जिसके सदस्य दुश्मन को मारकर उसके मांस को पकाकर खा जाते हैं। इसके अलावा मृतक की हड्डियों को गहनों की तरह पहनते हैं और उसके सिर को तकिया की तरह इस्तेमाल करते हैं। कई बार तो सिर को दो टुकड़ों में तोड़कर उसका बर्तन बना लेते हैं और उसमें खाना खाते हैं। ये जनजाति इतनी डरावनी है कि ये दुश्मन को मारने के बाद उसका मांस पकाते समय उत्सव मनाते हैं, इस जनजाति के लोग ऐसा इसलिए करते हैं जिससे दुश्मनों के दिल में खौफ पैदा हो जाए।

 

एक खबर में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, इस खौफनाक जनजाति का नाम अस्मत (Asmat) है। इस जनजाति के लोग अपने आपको योद्धा मानते हैं और दुश्मन को मारकर उसके सिर के मांस की दावत देते हैं, ऐसा करके अस्मत जनजाति के लोग अपनी वीरता और आदिवासियों के प्रति वफादारी का प्रदर्शन करते हैं।

 

 

अस्मत जनजाति के लोग दुश्मन को मारकर उसके सिर को पहले तंदूर में भूनते हैं और बाद में खा जाते हैं, इस दौरान वो कई रीति-रिवाजों का भी पालन करते हैं। बता दें कि दुश्मन का मांस पकाते समय न्यू गिनी में रहने वाले अस्मत जनजाति के लोग अनुष्ठान इसलिए भी करते हैं क्योंकि वो मनुष्य के सिर को पवित्र मानते हैं और उसकी तुलना पेड़ के फल से करते हैं।

इसके अलावा मृतक की हड्डियों का इस्तेमाल भविष्य के अनुष्ठानों में भी किया जाता है। उत्सव के दौरान दुश्मन के सिर को बच्चों के पैरों के बीच में रखा जाता है और इसके पीछे मान्यता है कि ऐसा करने से दुश्मन की शक्ति बच्चे में आ जाती है। जान लें कि अस्मत जनजाति के लोग दुश्मन की हड्डियों से आभूषण भी बना लेते हैं और कुछ लोग दुश्मन की हड्डियों को अपने घर में रखना शुभ मानते हैं।

अस्मत जनजाति के कुछ सदस्य तो दुश्मन की खोपड़ी का इस्तेमाल तकिया की तरह करते हैं, इसके अलावा वो खोपड़ी को दो भागों में तोड़कर उसमें भोजन करना भी पसंद करते हैं।गौरतलब है कि अस्मत जनजाति से अन्य जनजाति के लोग बहुत डरते हैं और इनके इलाके में जाने से बचते हैं।

 

 

अस्मत जनजाति के लोग अपने घर अधिकतर नदी के किनारे बनाते हैं, जिससे वो आसानी से शिकार कर सकें, आपको जानकर हैरानी होगी कि अस्मत जनजाति के सदस्य दुश्मन को मारने के बाद उसकी रीढ़ की हड्डी और निचले जबड़े के हिस्से को भी अपने साथ ले जाते हैं और इसे घर में किसी ट्रॉफी की तरह सजाते हैं। वो दुश्मन के निचले जबड़े को अपने घर में रखना शौर्य की निशानी मानते हैं और खुशी मनाते हैं।

हैरान करने वाली बात यह है कि न्यू गिनी में रहने वाले अस्मत जनजाति के लोग अपनी जनजाति के किसी सदस्य के मर जाने के बाद उसके शव की भी दुर्गति कर देते हैं। शोक मनाने से पहले वो मृतक का गला काट देते हैं और उसका मस्तिष्क व आंखें निकाल लेते हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने से बुरी आत्माओं को रोका जा सकता है, फिर वो जनजाति के किसी दूसरे सदस्य के शरीर में प्रवेश नहीं कर पाएंगी।

 

 

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