India-Namibia sign MoU : एमओयू के बाद कुनो नेशल पार्क में जल्द दिखाई देंगे अफ़्रीकी चीते, 69 साल पहले छत्तीसगढ़ में देख गया था जीवित

 

New Delhi : India-Namibia sign MoU भारत और नामीबिया के बीच एक समझौता हुआ है, जिसमें लगभग 69 सालों के बाद चीतों की वापसी की जाएगी। भारत और नामीबिया के बीच आज 20 जुलाई को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क को 15 अगस्त तक दुनिया के सबसे तेज दौड़ने वाले जानवर की पहली किश्त मिलने की संभावना है।

मिली जानकारी में भारत देश में दक्षिण अफ्रीका से कुल 12 चीतों की मिलने की उम्मीद है। जिसके लिए एक मसौदा समझौते पर पहले ही हस्ताक्षर किए जा चुके हैं, जिसके अंतिम रूप से जल्द ही होने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के सचिव एसपी यादव ने कहा कि वे देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 15 अगस्त तक चीतों को लाने की कोशिश कर रहे हैं। एनटीसीए के एक अधिकारी ने कहा, “हम 15 अगस्त तक (पहला बैच) चीतों को प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हमें इससे पहले सभी व्यवस्था करनी होगी और आगमन की सही तारीख तय करने के लिए सभी तौर-तरीकों पर चर्चा करनी होगी।”

नामीबिया के साथ समझौते के अनुसार, भारत को चार के दो बैचों में आठ चीते मिलेंगे। अधिकारियों ने कहा कि पहले बैच के दक्षिण अफ्रीका में एक गैर-सरकारी संगठन से आने की उम्मीद है। पर्यावरण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “अगस्त तक लगभग आठ चीतों को लाया जा सकता है।”

मध्य प्रदेश के मुख्य वन्यजीव वार्डन जेएस चौहान ने कहा, “हमने सभी बुनियादी तैयारी पूरी कर ली है और दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया की टीमों द्वारा अनुशंसित काम भी पूरा कर लिया है। अब, हम शिकार के आधार को बाड़ के अंदर स्थानांतरित कर रहे हैं।”

69 साल पहले दिखा था जीवित चीता 

भारत में अनितम बार जीवित चीता छत्तीसगढ़ में दिखाई दिया था। जिसके बाद भारत में चीता को वापस लाने की तैयारी है। चीता ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट (CTP) के तहत, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय का उद्देश्य जानवरों को कुनो के जंगल में छोड़ने से पहले एक बाड़े में प्रजनन करना है।

आपको बता दें कि जनवरी 2021 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित अनिवार्य विशेषज्ञ समिति द्वारा अफ्रीकी चीता की शुरूआत के लिए कुनो को आवास के रूप में चुना गया था, जिसका गठन सीटीपी को लागू करने के लिए किया गया था। जजों की पैनल ने 2010 और 2012 के बीच 10 साइटों का सर्वेक्षण किया था।

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