Bullet Train to Moon : चाँद का सफर कराएगी जापान की बुलेट ट्रेन, धरती की ग्रैविटी का होगा उपयोग, सफर करने ऐसे करें अपना रेजिस्ट्रेशन!

 

Bullet Train to Moon

 

नई दिल्ली, Bullet Train to Moon: जापान अपनी नई-नई टेक्नोलॉजी के लिए पूरी दुनिया मशहूर है, जापान में हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी इलेक्ट्रिक चीज़ो के बनाने का भण्डार मौजुद है, इस कड़ी में अब अपने नाम एक और उपलब्धि शामिल करने जा रहा है, जापान एक बेहद बड़ी योजना पर काम करने जा रहा है. वह धरती से एक बुलेट ट्रेन चलाएगा, जो लोगों को चांद पर पहुंचाएगी. यह ट्रेन पहले चांद तक जाएगी. इसमें सफलता हासिल करने के बाद इसे मंगल ग्रह तक चलाया जाएगा. इसके अलावा मंगल ग्रह पर ग्लास (Glass) हैबिटेट बनाने की भी योजना है. यानी इंसान एक आर्टिफिशियल स्पेस हैबिटेट में रहेगा, जिसका वातावरण धरती जैसा बनाया जाएगा.

आर्टिफिशियल स्पेस हैबिटेट में इस बात का ख्याल रखा जाएगा कि वहां पर इतनी ग्रैविटी और ऐसा वायुमंडल हो ताकि इंसान की मांसपेशियां और हड्डियां कमजोर न हो. जबकि, आमतौर पर कम ग्रैविटी वाले स्थानों पर मासंपेशियां और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं. देखने वाली बात ये है कि जहां एक तरफ अमेरिका फिर से चांद पर जा रहा है. चीन मंगल ग्रह पर खोज कर रहा है. रूस और चीन मिलकर चंद्रमा के लिए संयुक्त मिशन की योजना बना रहे हैं. वहीं, जापान ने बुलेट ट्रेन और आर्टिफिशियल स्पेस हैबिटेट की योजना बना ली. ऐसे में इंसानों का जल्दी ही किसी अन्य ग्रह पर रहना आसान होगा.

 

क्योटो यूनिवर्सिटी और काजिमा कंस्ट्रक्शन ने बनाई है योजना

यह योजना बनाई है क्योटो यूनिवर्सिटी और काजिमा कंस्ट्रक्शन ने मिलकर. ग्लास (Glass) एक कोन जैसा रहने लायक स्थान होगा. जिसमें आर्टिफिशियल ग्रैविटी होगी. सार्वजनिक यातायात की व्यवस्था होगी. हरे-भरे इलाके होंगे. जलस्रोत होंगे. इसके अंदर नदियां, पार्क, पानी आदि सबकुछ होगा जो एक इंसान के लिए जरूरी होता है. यह इमारत करीब 1300 फीट लंबी होगी. इसका प्रोटोटाइप 2050 तक बनकर तैयार हो जाएगा. फाइनल वर्जन बनने में लगभग एक सदी का समय लग सकता है.

चांद पर कैसे चलेगी बुलेट ट्रेन और कैसे बनेगा हैबिटेट… देखिए पूरा वीडियो

 

 

कॉलोनी का नाम- लूनाग्लास और मार्सग्लास, हेक्साट्रैक पर चलेगी ट्रेन

चांद पर बनने वाले ग्लास (Glass) कॉलोनी का नाम होगा लूनाग्लास (Lunaglass) और मंगल पर बनने वाली कॉलोनी का नाम होगा मार्सग्लास (Marsglass). इसके अलावा क्योटो यूनिवर्सिटी और काजिमा कंस्ट्रक्शन मिलकर स्पेस एक्सप्रेस (Space Express) नाम की बुलेट ट्रेन बनाने जा रहे हैं. जो धरती से चांद और मंगल के लिए रवाना होगी. यह एक इंटरप्लैनेटरी ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम (Interplanetary Transportation System) होगा. जिसे नाम दिया गया है हेक्साट्रैक (Hexatrack).

धरती पर बनेगा टेरा स्टेशन, इस पर से लॉन्च होगी स्पेस एक्सप्रेस

हर कैप्सूल रेडियल सेंट्रल एक्सिस पर चलेंगे. यानी चांद से मंगल ग्रह पर आने जाने के लिए 1G की ग्रैविटी मेंटेन की जाएगी. धरती पर बनने वाले ट्रैक स्टेशन का नाम होगा टेरा स्टेशन. ये स्टैंडर्ड गॉज ट्रैक से चलेंगी. जिसमें छह कोच होंगे. जिसे स्पेस एक्सप्रेस (Space Express) नाम दिया गया है. पहले और आखिरी कोच में रॉकेट बूस्टर्स लगे होंगे. जो इन्हें आगे और पीछे की तरफ ले जाने में मदद करेंगे. ताकि अंतरिक्ष में गति बढ़ाई या कम की जा सके. साथ ही धरती और चांद के गुरुत्वाकर्षण शक्ति के हिसाब से काम कर सकें.

 

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