Rupee-Dollar : अमेरिकी डॉलर के मुकाबले फिर टूटा रुपया, आम आदमी की जेब पर पड़ेगी महंगाई की मार

New Delhi : Rupee-Dollar अमेरिकी डॉलर के मुकाबले आरबीआई के रुपए में लगातार गिरावट देखी जा रही है. वहीं पिछले दिनों मोदी सरकार ने सोने के आयत शुल्क में 5 फीसदी की बढ़ोतरी की थी, जिसका अभी असर फीका नज़र आ रहा है। आज 5 जुलाई को भारत का रुपए डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड लो पर पहुंच गया।

मंगलवार को रुपए ने 79.15 (Rupee Price) के स्‍तर को छुआ। वहीं बीते सप्‍ताह रुपये ने 79.12 को छुआ था। सोमवार को रुपया 78.95 पर बंद हुआ था। डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमतों से देश का चालू खाता घाटा बढ़ रह है। वहीं जून में व्‍यापार घाटा भी डॉलर की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण रिकॉर्ड स्‍तर पर पहुंच गया है।

Read More :  Indian Rupee Vs American Dollar : भारतीय रुपए में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले आई जबरदस्त गिरावट, अगला रेजिस्टेंट टूटा तो 80 प्रति डॉलर जा सकता है भाव

 

यह विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ निकासी और भू-राजनैतिक के चलते रुपए में गिरावट देखी जा रही है। भारतीय शेयर बाजार से ही विदेशी संस्‍थागत निवेशकों ने जून में करीब 50 हजार करोड़ रुपये की निकासी की है। इसके अलावा पी-नोट के जरिये विदेशी निवेशकों के पैसे लगाने में भी कमी आई।

अमेरिकी फेड रिजर्व (FDS) के ब्‍याज दरें बढ़ाने से भी ग्‍लोबल मार्केट में डॉलर की मांग बढ़ गई है। रूस-यूक्रेन युद्ध व अन्‍य भू-राजनैतिक कारणों से ग्‍लोबल मार्केट में अनिश्चितता का माहौल है और ऐसे में सभी निवेशक डॉलर की ओर भाग रहे हैं।

Read More : जानिए कब तक तैयार हो सकता है Digital Rupee! फोन में रख सकेंगे डिजिटल करेंसी, जानिए इससे जुड़ी खास बातें

 

कैसा पड़ेगा आम आदमी पर असर

विदेशी डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट के चलते देश में व्यापार में घाटे के साथ आयत बिल भी बढ़ने वाले है। रुपया में गिरावट आने के चलते आयत महंगा हो जाएगा, क्‍योंकि भारतीय आयातकों को अब डॉलर के मुकाबले ज्‍यादा रुपया खर्च करना पड़ेगा। भारत अपनी कुल खपत का 85 फीसदी कच्‍चा तेल आयात करता है।

अब डॉलर महंगा होने के चलते तेल का व्यापार करने वाली कंपनियों को कच्‍चे तेल के आयात पर ज्‍यादा खर्च करना पड़ेगा। इससे उन पर घरेलू बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी करने का दबाव बढ़ेगा।

Read More : महंगाई दर 8 साल के हाईपर : ब्याज दर में फिर होने जा रही बढ़ोत्तरी! अगली तिमाही तक 5.15% तक हो सकता है रेपो रेट!

 

आगे चलकर कंपनियां ईंधन की दामों में बढ़ोतरी करती हैं तो माल ढुलाई की लागत बढ़ जाएगी। इससे रोजमर्रा की वस्‍तुओं के दाम बढ़ेंगे और जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ जाएगा। इसकी के साथ दूर देशों में अपनी पढ़ाई करने वालों पर भी अधिक खर्च बढ़ेगा, क्‍योंकि अब डॉलर के मुकाबले उन्‍हें ज्‍यादा रुपये खर्च करने पड़ेंगे. रुपया कमजोर होने से व्‍यापार घाटा भी बढ़ जाएगा। जून 2022 में व्‍यापार घाटा बढ़कर 25.63 बिलियन डॉलर हो चुका है।

JOIN TCP24NEWS WHATSAPP GROUP

Related Articles

Back to top button