Pandit Madhav Rao Sapre’s birth anniversary: पंडित माधव राव सप्रे की जयंती में CM बघेल ने उन्हें किया याद, कहा- सप्रे जी ने छ.ग. में पत्रकरिता की नई दिशा दी है…

 

पेंड्रा, अभिषेक गुप्ता: Pandit Madhav Rao Sapre’s आज पंडित माधव राव सप्रे जी की 151वी जयंती है और 122 साल पहले छत्तीसगढ़ नाम की कल्पना कर ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ नाम के हिंदी पत्रिका से पत्रकारिता की शुरूआत करने वाले सप्रे की कर्मभूमि पेंड्रा हैं, जहां से उन्होने हिंदी पत्रकारिता की शुरूआत की थी।

 

 

आज 19 जून को देश के प्रसिद्ध साहित्यकार और पत्रकार स्वर्गीय पंडित माधव राव सप्रे की 151वीं जयंती पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी उन्हें ट्वीट कर याद किया हैं। पं. माधव राव सप्रे छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के जनक थे। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व सभी साहित्यकारों, पत्रकारों और आम जनता के लिए भी प्रेरणादायक है।

 

उन्होंने आज से लगभग 122 साल पहले सन् 1900 में पेंड्रा से श्री रामराव चिंचोलकर के साथ मिलकर हिन्दी पत्रिका ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ का सम्पादन और प्रकाशन शुरू करते हुए छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की बुनियाद रखी थी। ‘छत्तीसगढ़ मित्र‘ में प्रकाशित सप्रे जी की कहानी ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ को हिन्दी की पहली मौलिक कहानी होने का गौरव प्राप्त है।

 

 

राज्य सरकार ने उनके सम्मान में पंडित माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान की भी स्थापना की है। स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में सप्रे जी ने अपनी लेखनी से आम जनता के बीच राष्ट्रीय चेतना के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए रायपुर में सन् 1912 में जानकी देवी कन्या पाठशाला की स्थापना की और वर्ष 1920 में यहां राष्ट्रीय विद्यालय की भी शुरूआत की।

 

 

सप्रे जी का निधन 23 अप्रेल 1926 को रायपुर के तात्यापारा स्थित उनके निवास में हुआ था। सप्रे जी की यादों के संजोने के लिये जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान डाईट पेंड्रा काॅलेज एवं पेंड्रा के लाइब्रेरी का नामकरण माधवराव सप्रे जी के नाम पर किया गया हैं। सप्रे जी का न केवल पेंड्रा में बल्कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में भी गौरवशाली स्थान रहा है.

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