19 साल बाद शुभ संयोग: मिथुन संक्रांति के साथ ही शुरू आषाढ़ माह, सूर्य को चढ़ाये जल होगा सभी परेशानियों का निवारण, बस शामिल करें यह सामाग्री…

 

19 साल बाद शुभ संयोग

 

 

नई दिल्ली, 19 साल बाद शुभ संयोग: ऐसा शुभ संयोग 19 सालो बाद बना है, यह शुभ संयोग 2003 के बाद अब बना है। धर्म ग्रंथों के अनुसार आषाढ़ मास में भगवान सूर्य (lord sun) की उपासना का विधान बताया गया है। पूरे महीने उगते हुए सूर्य को जल चढ़ाने से हर तरह की परेशानियां दूर हो जाती हैं। इसलिए ज्योतिषीयों के मुताबिक ये संक्रांति शुभ रहेगी। बता दे कि 15 जून को सूर्य राशि बदलकर अपने मित्र ग्रह बुध की राशि में आ गया है। संयोग से इस दिन बुधवार भी था। सूर्य के इस राशि परिवर्तन का असर सभी राशियों सहित देश-दुनिया पर भी दिखेगा। वहीं, इस बार सूर्य की संक्रांति पर आषाढ़ महीने की शुरुआत भी हुई है।

संक्रांति पर आषाढ़ महीने की शुरुआत
इस बार मिथुन संक्रांति पर आषाढ़ महीने की शुरुआत हुई है। ऐसा शुभ संयोग 19 साल बाद बन रहा है। इससे पहले 2003 में 15 जून, रविवार को ऐसा संयोग बना था। अब 19 साल बाद फिर से मिथुन संक्रांति पर्व के साथ आषाढ़ मास शुरू हो रहा है। शुभ संयोग के प्रभाव से इस महीने की गई सूर्य पूजा विशेष फलदायी होती है। इस महीने भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से बीमारियां और परेशानियां दूर होंगी।

 

 

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सूर्य के राशि परिवर्तन का क्या होगा असर

ज्योतिषाचार्य की माने तो बुधवार को मिथुन राशि में सूर्य का प्रवेश होने के कारण इस महीने में बुध की प्रधानता और बढ़ जाएगी। जिसके फलस्वरूप व्यापारिक क्षेत्र में आयात-निर्यात बढ़ने से आय के साधनों में वृद्धि होगी, साथ ही खाद्यान्न सामग्री एवं हरी सब्जियों की उपलब्धता प्रचुर मात्रा में रहेगी। शेयर बाजार से भी लोगों को लाभ मिलेगा। वहीं, महंगाई बढ़ सकती है। देश में कहीं ज्यादा तो कहीं कम बारिश होगी। अपराधों और गलत कामों को बढ़ावा मिल सकता है। बीमारियों में कमी आएगी। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अन्य देशों से भारत के संबंध अच्छे रहेंगे।

 

क्या है आषाढ़ में सूर्य पूजा का महत्व

आषाढ़ महीना 15 जून से 13 जुलाई तक रहेगा। इस महीने उगते हुए सूरज को जल चढाने की परंपरा है। आषाढ़ के दौरान सूर्य अपने मित्र ग्रहों की राशि में रहता है। इससे सूर्य का शुभ प्रभाव और बढ़ जाता है। स्कंद पुराण के मुताबिक इस महीने में भगवान विष्णु और सूर्य की पूजा करने से बीमारियां दूर होती हैं और उम्र भी बढ़ती है। आषाढ़ में रविवार और सप्तमी तिथि का व्रत रखने से मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। भविष्य पुराण में कहा गया है कि सूर्य को जल चढ़ाने से दुश्मनों पर जीत मिलती है।

 

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