प्रभारी मंत्री ने ऐसा क्या आरोप लगाया कि नाराज हो गये सीईओ जिला पंचायत ??

जिले के इतिहास में पहली बार आईएएस ने किया प्रभारी मंत्री की बैठक का बहिष्कार।

अनूपपुर-एस के मिनोचा: जिले के इतिहास मे पहली बार किसी आईएएस अधिकारी ने नाराज हो कर प्रभारी मंत्री की बैठक का बहिष्कार कर दिया। आखिर प्रभारी मंत्री ने ऐसा कौन सा आरोप लगा दिया कि सीईओ जिला पंचायत को बैठक से बाहर जाना पड़ा ? यह तो कोई नहीं बतला रहा लेकिन मामला निर्माण कार्यों के लंबित भुगतानों का बतलाया जा रहा है।जिले के शीर्ष अधिकारियों और म. प्र. शासन के दो मंत्रियों के बीच की खींचतान का दुष्प्रभाव अब शासकीय बैठकों पर भी पड़ता दिख रहा है।

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उपरोक्त संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार कलेक्ट्रेट सभागार में गुरुवार , 19 मई को आयोजित विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में खनिज मद से होने वाले विकास कार्यों के लंबित रहने और फाईलों की पेंडेंसी से नाराज प्रभारी मंत्री मीना सिंह ने जिले के शीर्ष अधिकारियों से भरे सभागार में सीईओ जिला पंचायत हर्षल पंचोली पर संगीन आरोप लगा कर खलबली मचा दी।

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आईएएस हर्षल पंचोली ने बिना किसी शिकायत और साक्ष्य के आरोप लगाने पर प्रभारी मंत्री से आरोप साबित करने की चुनौती दी और कड़ी आपत्ति दर्ज करवाते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया। प्रभारी मंत्री पुलिस अधीक्षक अखिल पटेल से भी नाराज थीं और उन्होंने उक्त दोनों अधिकारियों की शिकायत मुख्यमंत्री से करने की बात कही है।

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गुरुवार को तय कार्यक्रम के तहत प्रभारी मंत्री सुश्री मीना सिंह, मंत्री श्री बिसाहूलाल सिंह ,जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रुपमती सिंह, कलेक्टर सुश्री सोनिया मीणा ,पुलिस अधीक्षक श्री अखिल पटेल के साथ जिले के विभिन्न विभागाध्यक्षों की उपस्थिति में विकास कार्यों की समीक्षा बैठक ले रही थीं ।

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बैठक में उपस्थित कुछ अधिकारियों एवं अन्य पुष्ट सूत्रों ने नाम उजागर ना करने की शर्त पर बतलाया कि खनिज मद से होने वाले विभिन्न विकास कार्यों के सनय पर पूर्ण ना होने, फाईलों को लंबित रखने जैसे मुद्दों को लेकर प्रभारी मंत्री ने सीईओ जिला पंचायत से सवाल पूछते हुए , सरपंचों के हवाले से गंभीर आरोप लगा दिये । इसमें कोतमा नगर की आधी – अधूरी सड़क का मामला भी जुड़ा हुआ था।

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अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से खचाखच भरे बैठक में प्रभारी मंत्री के सार्वजनिक आरोपों से पंचोली नाराज हो गये। उन्होंने मंत्री से इस तरह के आधारहीन आरोप सार्वजनिक रुप से ना लगाने को कहा। इस पर मंत्री और भी नाराज हो गई और उन्होंने कार्य ना करने पर मुख्यमंत्री से शिकायत करने की चेतावनी दी। इस वाद – विवाद के बीच अधिकारी बैठक से ही उठ कर चले गये। बतलाया गया है कि प्रभारी मंत्री पुलिस अधीक्षक से भी खुश नहीं थीं।

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प्रभारी मंत्री से जिले के कुछ नेताओं ने संभवतः कुछ शिकायतें की हैं। बाद में तनाव पूर्ण माहौल के बीच बैठक पूर्ण हुई और बाद में कलेक्टर कक्ष में कलेक्टर के साथ मीना सिंह, बिसाहूलाल सिंह ने आन्तरिक बैठक की। इस बैठक मे भाजपा के किसी भी नेता को नहीं आने दिया गया। बैठक मे पुलिस अधीक्षक तो थे लेकिन सीईओ वहाँ नहीं थे।

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कहा तो यहाँ तक जा रहा है कि कलेक्टर सुश्री मीणा की तेज तर्रार, ईमानदार, दबंग कार्य शैली से जिले के कुछ नेता और अधिकारी असहज महसूस कर रहे हैं। जिस तरीके से अतिक्रमण , अवैध उत्खन के विरुद्ध धडाधड कार्यवाही हो रही है, उससे कुछ लोगों में बेचैनी है। खनिज मद से होने वाले तमाम निर्माण कार्यों में बेवजह की लेट लतीफी और भ्रष्टाचार की शिकायतों के बीच कलेक्टर ने कुछ दिन पूर्व ही सीईओ से इसका कार्य वापस लेकर इसके लिये जिला खनिज अधिकारी को प्रभारी बना दिया था। अब वे सीधे इसकी मानीटरिंग कर रही हैं।

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सूत्र तो यहाँ तक बतलाते हैं कि कुछ अधिकारियों की गुटबाजी और शराबखोरी की लत से जिले के आम लोगों के साथ वरिष्ठ अधिकारी भी परेशान हैं । यह व्यक्तिगत होता तो शायद जिले को असर ना पड़ता । भोपाल तक प्रेषित शिकायतें अधिकारियों के कार्यशैली पर बडे सवाल खडे कर रही हैं।

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अधिकारियों के ऐसे ही असहयोगात्मक मामलों में चाहे वो अमरकंटक के साधुओं द्वारा कलेक्ट्रेट मे एडीएम की उपस्थिति में जन सुनवाई में बवाल मचाने का हो ( तब प्रशासन की सूचना के बावजूद पुलिस लगभग बीस मिनट तक नहीं पहुंची थी ) या लाडली योजना की बैठक में कलेक्टर के बुलावे के बाद भी चारों जनपद पंचायतों के सीईऒ के ना आने का हो । ऐसी ही तमाम घटनाओं की शिकायतें जिले मे वायरल होती रही हैं। चार दिन पहले ही शहडोल कमिश्नर राजीव शर्मा ने सभी जिला पंचायत सीईओ को फाईलें लंबित ना रखने के निर्देश दिये थे।

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अब प्रभारी मंत्री ने भरी बैठक में सीईओ की क्लास लेकर जिले में सब कुछ ठीक ठाक ना होने की पुष्टि कर दी है। एक आला अधिकारी ने जिले की दशा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कलेक्टर मैडम इज आलवेज राईट । कुछ अधिकारी नेताओं के इशारे पर उन्हे डिस्टर्ब करना चाहते हैं ।

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इस विवाद के बाद आम टिप्पणियाँ हैं कि प्रभारी मंत्री को ऐसी कड़ी बातें बंद कमरे में , आन्तरिक बैठक लेकर करना था, ना कि ऐसे सार्वजनिक रुप से। कोई भी आईएएस अधिकारी जो प्रमोटी ना हो ,वह ऐसे किसी आरोप को स्वीकार क्यों करेगा ? पंचोली की प्रतिक्रिया भी तीव्र थी, वे इससे बच सकते थे।

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प्रभारी मंत्री, खाद्य मंत्री , कलेक्टर, एसपी के साथ तमाम अधिकारियों के बीच ऐसी अप्रिय घटना दोनों मंत्रियों और अधिकारियों के बीच खींचतान के खतरनाक संकेत हैं। सबसे अंतिम और महत्वपूर्ण तथ्य यह कि ऐसी महत्वपूर्ण आन्तरिक बैठक में सत्तारूढ़ दल के कुछ अनपेक्षित लोग भी थे। जिन पर इस विवाद को सार्वजनिक करने के संगीन आरोप हैं। यह भी कहा जा रहा है कि यदि बैठक में जिले के कुछ जिम्मेदार पत्रकार होते तो शायद सरकार और प्रशासन की इतनी भद्द ना पिटती।

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