BIG BREAKING : सबसे बड़े कोयला खदान में चोरी का खेल, हरकत में आये कलेक्टर और आईजी, लंबे समय से हावी माफिया राज…

छत्तीसगढ़ कोरबा खदान से कोयला चोरी होने का एक वीडियो वायरल हो गया है

कोरबा। छत्तीसगढ़ कोरबा खदान से कोयला चोरी होने का एक वीडियो वायरल हो गया है। वहीं, इस वीडियो के वायरल होते ही सिस्टम की पूरी पोल खुल गई हैं। जांच शुरू होने से पहले एसईसीएल से लेकर CISF और SP हरकत में आ गई है

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एसईसीएल अफसरों के निर्देश पर CISF ने खदान एरिया में सर्चिंग और गश्त बढ़ा दी है। साथ ही दूसरी ओर एसपी ने दीपका थाना प्रभारी और हरदीबाजार के चौकी प्रभारी को लाइन अटैच किया। जांच से पहले कार्रवाई कर अफसर खुद का पल्ला झाड़ रहें है|

दरअसल, एशिया के सबसे बड़ी कोल माइंस कोरबा स्थित गेवरा खदान में कोयला चोरी का वीडियो वायरल होने के बाद खलबली मच गई है। यह वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। इसके बाद वायरल वीडियो पर आईजी रतनलाल डांगी जांच का आदेश दे दिया|

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एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट की जांच शुरू होनी है। उससे पहले एसपी भोजराम पटेल ने दीपका थाना प्रभारी अविनाश सिंह और हरदीबाजार चौकी प्रभारी अभय सिंह को लाइन अटैच किया है। इस आदेश में कोयला चोरी का जिक्र नहीं है।

बता दे कि वायरल वीडियो पर आईजी रतनलाल डांगी ने जाँच के आदेश दिए, जिसके बाद कलेक्टर रानू साहू भी हरकत में आ गई हैं| वही, वीडियों वायरल होने के बाद कोरबा जिला कलेक्टर रानू साहू, जिला पुलिस अधीक्षक पटेल गेवरा खदान में कोयला चोरों द्वारा लोडिंग पॉइंट को देखने पहुंचे और खुद वीडियो बनाकर एसईसीएल प्रबंधन को वैरिटेटिस करने का निर्देश दिया हैं|

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कलेक्टर ने कहा कि कोयला चोरी का वीडियों वायरल होने के बाद हमारी टीम संयुक्त रूप से जाँच के लिए पहुंची हैं| पूर्व में फरवरी मार्च महीने में हमने एक मीटिंग ली थी, एसईसीएल और CISF की| निर्देश की बाद भी वैसा काम यहाँ हुआ नही हैं| हमने इसका पूरा विडियो रिकॉर्ड किया हैं|

लंबे समय से चल रहा माफिया राज –

दरअसल, भारी वाहनों में कोयला लोड कर चोरी कर खपाने का अवैध कारोबार काफी पहले से चल रहा है। इन माफियाओं का CISF और स्थानीय पुलिस से तगड़ी सेटिंग है। इसलिए कोयला निकालने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं होती। साथ ही ट्रक और ट्रेलर में बिना दस्तावेज कोयला ठिकाने तक पहुंचाने के लिए संबंधित थानेदार और पुलिस अफसरों से सेटिंग रहती है। इस वजह से बिना किसी दस्तावेज के कोयला बेखौफ बिलासपुर और आसपास के कोल डिपो तक पहुंच जाता है।

एसईसीएल की अफसरों से सेटिंग, नही जाते थाने –

कोल माफियाओं से सेटिंग के चलते ही एसईसीएल अफसर न तो कभी छापेमारी करते और न कोयला चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराते| रोज खदानों से एक मालगाड़ी के बराबर यानी की 4 हजार टन कोयला सिर्फ चोरी में चला जाता है। इसके बाद भी SECL प्रबंधन की तरफ से कभी कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाती। यहाँ सभी की मिलीभगत के कारण कोई सख्ती नही हैं|

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