आकाशगंगा के केंद्र में मिला सुपरमैसिव ब्लैक होल, जाने क्या होता है ब्लैक होल, जिसमें रोशनी भी हो जाती है गायब ?

New Delhi : वैज्ञानिको ने पहली बार गंगा के बीचो बिच सुपरमैसिव ब्लेक होल होने की तस्वीर जारी की है। यह सभी लिए ये ऐतिहासिक है, जब पहली बार खगोलविदों ने हमारी आकाशगंगा के केंद्र में एक सुपरमैसिव ब्लैक होल की एक छवि पर खोज कर लिया है। पूरी दुनिया ने आज आकाशगंगा के केंद्र में ब्लैक होल की पहली दहकती हुई लेकिन धुधली तस्वीर देखी।

कुछ इस तरह की है तस्वीर

सैजिटेरियस ए नाम का यह ब्लैक होल हमारे सूर्य के द्रव्यमान से 43 लाख गुना बड़ा है. नीचे दी गई इस तस्वीर को ध्यान से देखिए. इसमें एक गहरा अंधेरा क्षेत्र दिख रहा है यही ब्लैक होल है. यह पूरा इलाका गुरुत्वाकर्षण बलों के जरिए सुपर-हीटेड गैस से आने वाले प्रकाश से घिरा होता है.

इंटरनेशनल कंसोर्टियम ने जारी की तस्वीर

ये तस्वीरें इंटरनेशनल कंसोर्टियम (International Consortium) ने जारी की है. उत्सुकता से प्रतीक्षित चित्र, दुनिया के सामने आई है, धनु A* को दर्शाता है. यह ब्लैक होल हमारे सौर मंडल से 27,000 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर स्थित है. यह तस्वीर Horizon Telescope से खींची गई है. दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह के 8 सिंक्रोनाइज रेडियो टेलीस्कोप लगाए गए हैं.

एरिजोना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फेरियल ओज़ेल ने कहा कि ‘यह छवि ब्लैक होल के चारो तरफ एक चमकती हुई अंगूठी की तरह है. इस ब्लैक होल को धनु A कहा जाता है. सुपरमैसिव ब्लैक होल के वहां होने का संदेह है. यह दशकों से गहन खगोलीय अध्ययन का केंद्र रहा है. इसके चारों ओर परिक्रमा कर रहे तारों के अवलोकन से एक ऐसी चीज का पता चला जो बहुत भारी है.’

 ब्लैक होल में वह जगह है जहां भौतिक का कोई नियम काम नहीं करता। मतलब समय और स्थान का कोई मतलब नहीं है। यहां बस और अंधकार है। इसका गुरुत्वाकर्षण इतना शक्तिशाली होता है कि जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते हैं। इसके खिंचाव से यह प्रकाश को भी अवशोषित कर लेता है। मतलब यह कि इसमें जो भी डाला, वह बाहर नहीं निकलेगा।
2. आप इसे इस तरह समझें कि जब हम किसी टॉर्च से प्रकाश डालते हैं तो वह प्रकाश रिफ्लेक्ट होकर हमारी आंखों पर आता है तभी वह चीज हमें दिखाई देती है, लेकिन यदि मान लो कि प्रकाश वापस लौट कर ही नहीं आया तो वह जगह ब्लैक होल हो सकता है। ऐसा ही स्पेस में होता है।
3. दरअसल, जब कोई विशाल तारा अपने अंत की ओर पहुंचता है तो वह अपने ही भीतर सिमटने लगता है। धीरे-धीरे वह भारी भरकम ब्लैक होल बन जाता है और फिर उसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति इतनी बड़ जाती है कि उसके प्रभाव क्षेत्र में आने वाला हर ग्रह उसकी ओर खिंचाकर अंदर चला जाता है। वह सब कुछ अपने में निगलने लगता है।
इसके प्रभाव क्षेत्र को ही इवेंट हॉराइजन कहते हैं। किसी भी चीज का गुरुत्वाकर्षण स्पेस को उसके आसपास लपेट देता है और उसे कर्व जैसा आकार दे देता है।
4. स्टीफन हॉकिंग के अनुसार इसके बाहरी हिस्से को इवेंट हॉराइजन कहते हैं। स्टीफन हॉकिंग की खोज के मुताबिक हॉकिंग रेडिएशन के चलते एक दिन ब्लैक होल पूरी तरह द्रव्यमान मुक्त हो कर गायब हो जाता है। ब्लैक होल की खोज कार्ल स्क्वार्जस्चिल्ड और जॉन व्हीलर ने की थी।
5. यह हो सकता है कि आप किसी दूसरे ग्रह पर जीवन की तलाश में निकले हों या फिर अंतरिक्ष यान से बाहर निकले हों और तभी ब्लैक होल की चपेट में आ जाएं और उसमें गिर जाएं। ऐसे में आपके साथ क्या होगा, इसकी कई संभावनाएं हैं। मतलब यह कि एक बात तो स्पष्ट है कि ब्लैक होल में गिरने के बाद आप ब्लैक होल की बाहरी सतह पर जल कर राख हो सकते हैं या फिर उसके अंदर आसानी से पहुंचकर अनंत गहराइयों में खो सकते हैं।
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