CG News: कभी नहीं देखीं होगी ऐसी शादी, आग को नहीं पानी को साक्षी मान लिए सात फेरे….

 

जगदलपुर: आपने धुरवा समाज के बारे में तो सुना ही होगा, इन लोगो ने कल यानि रविवार(Sunday) को समाज का 16वां स्थापना दिवस (Foundation Day) मनाया तो वहीं दूसरी ओर आज यानी सोमवार (Monday) को पहली बार इस समाज के 20 युवक-युवतियां (young men and women) सामूहिक रूप से शादी करेंगे। इस शादी में खास बात ये है कि 20 जोड़े आग नहीं बल्कि कांगेर नदी के पानी को साक्षी मानकर सात फेरे लेगें। जिसकी समाज के लोगों ने तैयारी पूरी कर दी है।

 

इस शादी में शामिल कोई भी जोड़ा नाबालिग (Minor) नहीं होगा। इसका विशेष ध्यान दिया गया है, समाज के लोगों ने बताया कि इससे पहले 2019 में केवल तीन जोड़ों की शादी छिंदावाड़ा-कावारास (Chhindwara-Kawaras) में स्थापना दिवस पर की गई थी। यह पहली बार जब एक साथ समाज के 20 युवक और युवतियां अपनी सालों पुरानी परंपरा का पालन करते हुए शादी में शामिल होंगे।

 

 

 

 

समाज के महासचिव गंगाराम कश्यप (General Secretary Gangaram Kashyap) ने बताया कि बेटियों की शादी करने में काफी पैसे खर्च होते हैं। यह फिजूलखर्ची रुके और समाज की परंपराएं बनी रहे इसको लेकर कुछ दिनों पहले सामूहिक शादी की योजना बनाई गई थी। जिसको समाज के सदस्यों ने अपनी स्वीकृति दी।

 

 

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जाेड़ों काे दिया जाएगा प्रमाण पत्र

समाज के महासचिव गंगाराम ने बताया कि समाज में दहेज की परंपरा नहीं है। समाज के युवक और युवती इस शादी में अग्नि को साक्षी मानकर 7 फेरे लेने की जगह कांगेर नदी के पानी को साक्षी मानकर शादी करेंगे। इसके लिए कांगेर नाला जिसे बोलचाल की भाषा में कांगेर नदी कहा जाता है उसके पानी को लाने के इंतजाम किया जा रहा है। शादी में शामिल जाेड़ों का पंजीयन किया जा रहा है।

 

 

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पानी और पेड़ की पूजा करते हैं लोग

समाज के लोगों ने बताया पुरानी मान्यता के अनुसार समाज के लाेग हर कार्यक्रम में पेड़ और पानी की पूजा करते हैं। शादी भी एक पवित्र कार्यक्रम है।इसको ध्यान में रखते हुए पानी को साक्षी मानकर शादी करवाई जाती है। इस शादी में दूल्हा-दुल्हन ही नहीं बल्कि पूरे गांव के लोग फेरे लेते हैं। महासचिव ने बताया शादी में सेमल पेड़ के साथ ही नदी, नाले और तालाब और कुएं के पानी का उपयोग करते हैं। जिसे देव पानी कहा जाता है।

 

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