Mother’s Day Special: हालातों के आगे जब साथ ना जुबां होती है,पहचान लेती है खामोशी में हर दर्द वह सिर्फ मां होती है…

 

 

रायपुर। मां संसाररूपी भंवर से पार लगाने वाली है। मां के स्मरण मात्र से मन का हर कोना महक उठता है, मां के समान कोई और दूसरा नहीं। मां वो साथी है जो अपनी आखिरी सांस तक साथ देती है। मां की मौजूदगी जीवन को स्वर्ग बना देती है। बहुत खुशनसीब होते हैं वो लोग जिनकी मां होती है। मां साथ है तो समझ लो साक्षात भगवान (God) तुम्हारे पास है। मां को लक्ष्मी का स्वरूप भी माना गया।

 

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शास्त्रोनुसार सृष्टि का आरंभ मनु और शतरूपा नामक स्त्री-पुरुष के समागम से हुआ। मनु के नाम पर ही उनकी संतान को मनुज या मानव कहा गया। मनु की संतान को जिसने जन्म दिया, उसे ‘मां’ कहा गया। और इस प्रकार मां शब्द की उत्पत्ति हुई।

 

 

भारतीय संस्कृति (Indian culture) में सबसे पहले मां शब्द की उत्पत्ति गोवंश से हुई। गाय का बछड़ा जब जन्म लेता है, तो वह सर्वप्रथम अपने रंभानें में जो स्वर निकालता है वह मां होता है। यानी कि बछड़ा अपनी जन्मदात्री को ही ‘मां’ के नाम से पुकारता है। इस प्रकार जन्म देने वाली को मां कहकर पुकारा जाने लगा।

 

 

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आज पूरा दुनिया अंतरराष्ट्रीय मातृत्व दिवस (international mother’s day) मना रहा है। आज का दिन माृत शक्ति को समर्पित है। जिसे लोग मदर्स डे (Mothers day), मातृ दिवस या माताओं का दिन चाहे जिस नाम से पुकारें यह दिन सबके मन में विशेष स्थान रखता है। पूरी जिंदगी भी मां को समर्पित कर दी जाए तो भी माँ के ऋण से उऋण नहीं हुआ जा सकता है। संतान के लालन-पालन के लिए हर दुख का सामना बिना किसी शिकायत के करने वाली माँ के साथ बिताये दिन सभी के मन में आजीवन सुखद व मधुर स्मृति के रूप में सुरक्षित रहते हैं। भारतीय संस्कृति में माँ के प्रति लोगों में अगाध श्रद्धा रही है।

 

 

यशोदा, कुन्ती, सीता, पार्वती, मायादेवी, पन्ना धाय सहित न जानें और कितनी माये हैं जो आज भी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

 

मानव को ईश्वर ने मां के रूप में उपहार दिया है। आज कुछ लोग इस अनमोल धरोहर को संभाल नहीं पा रहें है। स्वार्थवश माँ की गरिमा को भूल रहे हैं. उसकी कद्र नहीं करते अपमानित करते हैं. साथ में नहीं रखना चाहते. समाज में ऐसी बहुत घटनाएं होती हैं, जिसमें माताएं अपमानित होती रहती हैं। और हम मूक दर्शक बनकर देखते रहते हैं। माँ का हृदय तार-तार होता रहता है। इस सब के बावजूद माँ के हलक से एक ही आशीष निकलता है तुम जीओ मेरे लाल…

 

 

माँ एक सुखद अनुभूति है। वह एक शीतल आवरण है जो हमारे दु:ख, तकलीफ की तपिश को ढँक देती है। उसका होना, हमें जीवन की हर लड़ाई को लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। सच में, शब्दों से परे है माँ की परिभाषा…

 

अंतरराष्ट्रीय मदर्स डे पर सभी मांओं को टीसीपी24 का सलाम…

 

 

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