राष्ट्रपति का देश के नाम सम्बोधन, जनरल बिपिन रावत समेत महानायकों को किया याद

 

नई दिल्ली। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या को मंगलवार को राष्ट्र के नाम संबोधन दिया. राष्ट्रपति ने कहा कि गणतंत्र दिवस का यह अवसर उन वीर महानायकों को याद करने का भी है, जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया. दो दिन पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस की डिजिटल प्रतिमा का अनावरण भी किया गया. राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे संविधान का स्वरूप विस्तृत है, लेकिन इसकी प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समानता जैसी बुनियादी बातें लिखी हुई हैं. मूल अधिकार औऱ मूल कर्तव्यों को भी संविधान में महत्वपूर्ण ढंग से उल्लेखित किया गया है. ये दोनों ही एक सिक्के के दो पहलू हैं. राष्ट्रपति ने कहा, आज नया भारत उभर रहा है-यह सशक्त भारत-संवेदनशील भारत है.

स्वच्छता अभियान से लेकर कोरोना टीकाकरण तक जन अभियान की सफलता इसी बात का परिचायक है कि देशवासी किस कर्तव्यनिष्ठा से देश सेवा में जुटे हैं. 26 नवंबर 1949 को संविधान दिवस मनाया जाता है. सन 1930 से 1947 तक हर वर्ष को पूर्ण स्वराज दिवस के तौर पर मनाया जाता है और उसी दिन को संविधान को पूरी तरह अंगीकार करने के तौर पर मनाया गया. महात्मा गांधी ने कहा था कि गणतंत्र दिवस के दिन को किसी रचनात्मक कार्य में लगाना चाहिए.

गांधी जी चाहते थे कि हम सब आत्मनिरीक्षण करें और देश के साथ विश्व की बेहतरी के लिए काम करें. अब दो साल से अधिक समय बीत गया है, लेकिन मानवता का महामारी के खिलाफ संघर्ष जारी है. पूरे देश की अर्थव्यवस्था को आघात पहुंचा है, नित नए रूपों में ये वायरस संकट पैदा कर रहा है. यह एक असाधारण चुनौती बना हुआ है. हमारे देश में जनसंख्या का घनत्व ज्यादा है और हमारे पास शुरुआत में पर्याप्त संसाधन नहीं थे, लेकिन ऐसे समय में किसी देश की क्षमता निखरती है. हमने कोरोनावायरस से लड़ने की दिशा में असाधारण प्रदर्शन किया है. हम अब दुनिया में सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चला रहे हैं.

प्रेसिडेंट ने कहा, संकट की इस घड़ी में हम सभी ने ये देखा है कि कैसे हम सभी देशवासी एक परिवार की तरह आपस में जुड़े हुए हैं. सोशल डिस्टेंसिंग के कठिन दौर में हम सबने एक-दूसरे के साथ निकटता का अनुभव किया है. हमने महसूस किया है कि हम एक-दूसरे पर कितना निर्भर करते हैं. कठिन परिस्थितियों में लंबे समय तक काम करके, यहां तक ​​​​कि मरीजों की देखभाल के लिए अपनी जान जोखिम में डाल कर भी डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिक्स ने मानवता की सेवा की है. बहुत से लोगों ने देश में गतिविधियों को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए यह सुनिश्चित किया है कि अनिवार्य सुविधाएं उपलब्ध रहें और सप्लाई-चेन में रुकावट न पैदा हो.

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वहीँ उन्होंने सीडीएस जनरल बिपिन रावत को याद करते हुए कहा – ”
पिछले महीने, एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना में, हमने देश के सबसे बहादुर कमांडरों में से एक – जनरल बिपिन रावत – उनकी पत्नी और कई बहादुर सैनिकों को खो दिया। दुखद क्षति से पूरे देश को गहरा दुख हुआ।” आज, यह हमारे सैनिक और सुरक्षाकर्मी हैं जो राष्ट्रीय गौरव की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। हिमालय की असहनीय ठंड में और मरुभूमि की भीषण गर्मी में अपने परिवार से दूर मातृभूमि की रक्षा करते रहते हैं।

 

उन्होंने आगे कहा – मैं भारत के उन लोगों से अनुरोध करता हूं जो अपनी मेहनत और प्रतिभा के कारण जीवन में सफल होते हैं, वे अपनी जड़ों, अपने गांव, कस्बे या शहर को हमेशा याद रखें।

 

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