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Omicron Alert: दूसरे देशों से प्रदेश में आने वालों की होगी Genome Sequencing, आखिर क्या होती है ये सिक्वेंसिंग और देश में कहा कहा है इसकी सुविधा

Mahendra Kumar SahuNovember 30, 20211min

 

रायपुर : राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग ने दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिकॉर्न (Omicron) को देखते हुए समुचित निगरानी और व्यापक सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने सभी कलेक्टरों को परिपत्र जारी कर कोविड-19 के नए वेरिएंट की त्वरित पहचान और बचाव के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं। प्रदेश के तीनों हवाई अड्डों रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर में हेल्प डेस्क स्थापित कर विदेश से आने वालों की स्क्रीनिंग, कोविड-19 जांच रिपोर्ट, टीकाकरण तथा भारत आने के बाद क्वारेंटाइन एवं कोरोना के लक्षण सम्बन्धी जानकारी लेते हुए केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार आवश्यक कार्यवाही करने को कहा गया है।

 

स्वास्थ्य विभाग ने राज्य सर्वेलेंस इकाई से समन्वय कर सभी जिलों को प्रतिदिन विदेशों से अन्तर्राष्ट्रीय यात्रा कर आने वाले व्यक्तियों की जानकारी लेने के निर्देश दिए हैं। ऐसे व्यक्ति जिन्होंने भारत आने के बाद अपनी सात दिनों की क्वारेंटाइन अवधि पूरी नहीं की है, उन्हें सात दिनों के होम-क्वारेंटाइन का पालन सुनिश्चित कराने कहा गया है। इन व्यक्तियों के आठवें दिन आरटीपीसीआर जांच कराने और रिपोर्ट के धनात्मक आने पर सैंपल को डब्ल्यू.जी.एस. (Whole Genome Sequencing) जांच के लिए भेजने के भी निर्देश दिए गए हैं।

 

 

 

विभाग ने सभी जिलों को नए वेरिएंट से बचाव एवं उसकी त्वरित पहचान के लिए कोविड-19 जांच की संख्या बढ़ाने कहा है। सभी जिलों को निर्धारित लक्ष्य के अनुसार कोरोना जांच सुनिश्चित करने कहा गया है। नए वेरिएंट की पहचान एवं निगरानी के लिए रोज हर जिले को आरटीपीसीआर जांच में धनात्मक आने वाले कम से कम पांच प्रतिशत सैंपलों को डब्ल्यू.जी.एस. जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों में कोरोना टीकाकरण का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने कहा है। साथ ही कोविड अनुकूल व्यवहार (Covid Appropriate Behavior) जैसे मास्क लगाना, परस्पर दूरी एवं समय-समय पर हाथ धोने की आदतों के पालन के लिए कलेक्टरों को व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं।

 

 

क्या है जीनोम सिक्वेंसिंग ?

जीनोम सीक्वेंसिंग एक तरह से किसी वायरस का बायोडाटा होता है. कोई वायरस कैसा है, किस तरह दिखता है, इसकी जानकारी जीनोम से मिलती है. इसी वायरस के विशाल समूह को जीनोम कहा जाता है. वायरस के बारे में जानने की विधि को जीनोम सीक्वेंसिंग कहते हैं. इससे ही कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में पता चला है.

 

 

 

देश में कहां-कहां है सुविधा

गुजरात के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग में एक बड़ी सफलता हासिल की है. यहां के वैज्ञानिकों ने देश में पहली बार कोरोना वायरस के पूरे जीनोम सिक्वेंस को खोजा है. गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के पूरे जीनोम सिक्वेंस को खोज लिया है. जीनोम सिक्वेंस से कोरोना वायरस की उत्पत्ति, दवा बनाने, वैक्सीन विकसित करने, वायरस के टारगेट और वायरस को खत्म करने को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें पता चलेंगी.

 

 

वैसे भारत में जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा कम है. देश में जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (नई दिल्ली), सीएसआईआर-आर्कियोलॉजी फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (हैदराबाद), डीबीटी – इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज (भुवनेश्वर), डीबीटी-इन स्टेम-एनसीबीएस (बेंगलुरु), डीबीटी – नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स (NIBMG), (कल्याणी, पश्चिम बंगाल), आईसीएमआर- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (पुणे) जैसे चुनिंदा प्रयोगशालाएं हैं.


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