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छत्तीसगढ़ चेम्बर ने वस्त्रों पर GST की दर को यथावत रखने केन्द्रीय वित्त मंत्री सीतारमण को भेजा पत्र..

Mahendra Kumar SahuNovember 22, 20211min

रायपुर। छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश अध्यक्ष अमर पारवानी, महामंत्री अजय भसीन, कोषाध्यक्ष उत्तमचंद गोलछा, कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र जग्गी, विक्रम सिंहदेव,राम मंधान, मनमोहन अग्रवाल ने बताया कि कपड़ा पर 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत टैक्स लगाने के संबंध में छत्तीसगढ़ चेम्बर द्वारा केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र प्रेषित कर टैक्स यथावत 5 प्रतिशत रखने हेतु निवेदन किया गया है।

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चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष अमर पारवानी ने कहा कि कपड़ा पर टैक्स बढ़ाने के सरकार के फैसले से पूरा कपड़ा व्यापार और उद्योग सदमे में है, जो कृषि के बाद दूसरी सबसे बड़ी राजस्व पैदा करने वाली वस्तु है। कपड़ा व्यापार कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित हुआ था, और अभी भी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। ऐसी परिस्थितियों में टेक्सटाइल पर टैक्स की दरों में यह बढ़ोतरी टेक्सटाइल सेक्टर में एक और बहुत बड़ा झटका देगी। भोजन, कपड़ा, मकान, शिक्षा और स्वास्थ्य मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताएँ हैं। कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा पर कोई कर नहीं है, आवासीय घरों पर सरकार सब्सिडी प्रदान कर रही है और टैक्स की दर 1 प्रतिशत और 5 प्रतिशत है। कपड़े जो कि एक बुनियादी जरूरत भी है, लेकिन कपड़ा व्यापार पर 12 प्रतिशत कर लगाया जाना उचित नहीं है।

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पारवानी ने कहा कि कई वर्षों तक कपड़ों पर कोई टैक्स नहीं लगता था। भारत भर के व्यापार संघों ने पिछली जीएसटी परिषद की बैठक के तुरंत बाद प्रतिनिधित्व किया था जिसमें कपड़ा पर ”उल्टे” (पदअमतजमक)शुल्क संरचना को ठीक करने का प्रस्ताव था। व्यापार और उद्योग द्वारा यह अनुरोध किया गया था कि यथास्थिति को 5 प्रतिशत की दर से बनाए रखा जाए और जहां भी लागू हो, दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की जाए। हालांकि, दर को 5 प्रतिशत तक कम करने के बजाय अधिसूचना संख्या 14/2017 दिनांक 18.11.2017 को कर की दर को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया है।

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चेम्बर प्रदेश अध्यक्ष पारवानी ने कहा कि यह न केवल अंतिम उपयोगकर्ता पर वित्तीय बोझ बढ़ाएगा बल्कि छोटे व्यवसायियों को भी बुरी तरह प्रभावित करेगा और कर चोरी और विभिन्न कदाचार को प्रोत्साहित करेगा। साथ ही जो माल व्यवसायियों के स्टॉक में पड़ा है जब एमआरपी पर बेचा जायेगा तो उसका 7 प्रतिशत अतिरिक्त भार व्यवसायियों पर पड़ेगा। कर की दर में यह वृद्धि न केवल घरेलू व्यापार को बाधित करेगी बल्कि निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी। पहले से ही कपड़ा उद्योग वियतनाम, इंडोनेशिया, बांग्लादेश और चीन जैसे देशों के साथ सक्षम स्थिति में नहीं है। एक तरफ सरकार मेक इन इंडिया और आत्मानिर्भर भारत के बारे में बात करती है, दूसरी तरफ इस तरह के उच्च कर लगाने से अनिश्चितता और निराशा का माहौल पैदा होता है।

 

 

पारवानी ने केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से अनुरोध किया है कि मूल्य पर किसी भी सीमा और श्रेणी के बिना 5ः की दर से एकल दर पेश की जाए और इस प्रकार जारी अधिसूचना को जिसमें कर की दर को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया है, कृपया इसे तत्काल वापस लिया जाए। सरकार के इस कदम से न सिर्फ अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि उम्मीद और निश्चितता का माहौल बनेगा। यदि कपड़ा व्यापार और उद्योग के इस अनुरोध और स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया गया तो पूरा उद्योग अस्तित्व के लिए संघर्ष करने की स्थिति में होगा और अंततः पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगा।

 


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