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सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को किया ख़ारिज, कहा- पॉक्सो एक्ट में स्किन टू स्किन कॉन्टैक्ट जरूरी नहीं…

Mahendra Kumar SahuNovember 18, 20211min

 

 

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने ‘पॉक्सो एक्ट पर एक अहम फैसला सुनाया है. सुको के इस फैसले के बाद पाक्सो एक्ट में अब स्किन टू स्किन कॉन्टैक्ट जरूरी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से रेप केस को लेकर दिए स्किन टू स्किन कॉन्टेक्ट वाले फैसले को खारिज कर दिया है.

 

 

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सभी पक्षों की दलीले सुनी थी. इसके बाद 30 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

 

 

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बता दें कि उच्च न्यायालय के पाक्सो एक्ट पर फैसले को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि पॉक्सो ऐक्ट के तहत यौन उत्पीड़न का अपराध तभी माना जा सकता है, जब आरोपी और पीड़िता के बीच स्किन कॉन्टेक्ट हुआ हो।

 

 

 

अदालत के इस फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार, राष्ट्रीय महिला आयोग और अटॉर्नी जनरल ने अपील दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए ही जस्टिस उदय उमेश ललित, जस्टिस एस. रविंद्र भट और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की बेंच ने फैसले को खारिज कर दिया है।

 

 

 

जस्टिस बेला त्रिवेदी ने हाई कोर्ट के फैसले को बेतुका बताते हुए कहा, ‘पॉक्सो ऐक्ट के तहत अपराध मानने के लिए फिजिकल या स्किन कॉन्टेक्ट की शर्त रखना हास्यास्पद है और इससे कानून का मकसद ही पूरी तरह से खत्म हो जाएगा, जिसे बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया है।’ कोर्ट ने कहा कि इस परिभाषा को माना गया तो फिर ग्लव्स पहनकर रेप करने वाले लोग अपराध से बच जाएंगे। यह बेहद अजीब स्थिति होगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि नियम ऐसे होने चाहिए कि वे कानून को मजबूत करें न कि उनके मकसद को ही खत्म कर दें।

 


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