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मास्क, दस्ताना और फेस शील्ड जैसे सिंगल यूज प्लास्टिक बना काल, जल्द सुधार नही हुआ तो उठाना पड़ सकता है भारी नुकसान..

Mahendra Kumar SahuNovember 14, 20211min

 

नई दिल्ली। कोरोना महामारी के कारण वैश्विक स्तर पर 80 लाख टन से अधिक प्लास्टिक कचरा पैदा हुआ है, जिसमें से 25,000 टन से अधिक प्लास्टिक कचरा महासागरों में गया है. एक अध्ययन में यह बात सामने आई है. ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ पत्रिका में प्रकाशित एक रिसर्च स्टडी में पाया गया कि महासागर के प्लास्टिक मलबे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा तीन से चार वर्षों के भीतर लहरों के माध्यम से समुद्र तटों पर आने की उम्मीद है.

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रिसर्च स्टडी में बताया गया है कि मलबे का एक छोटा हिस्सा खुले समुद्र में चला जाएगा जो अंततः महासागर के बेसिन के केंद्रों में फंस जाएगा. इसके कारण वहां कचरा जमा हो सकते हैं और वे आर्कटिक महासागर में जमा हो सकते हैं.प्लास्टिक कचरे पर हुई इस रिसर्च स्टडी में शोधकर्ताओं ने उल्लेख किया कि कोविड-19 महामारी ने फेस मास्क, दस्ताने और फेस शील्ड जैसे सिंगल यूज प्लास्टिक की मांग में वृद्धि की है. इसके परिणाम स्वरूप उत्पन्न कचरे का कुछ हिस्सा नदियों और महासागरों में चला गया जिसने पहले से ही नियंत्रण से बाहर वैश्विक प्लास्टिक समस्या पर दबाव बढ़ा दिया है.

 

 

चीन में नानजिंग विश्वविद्यालय और अमेरिका के सैन डिएगो में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (यूसी) के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में टीम ने भूमि स्रोतों से निकलने वाले प्लास्टिक पर महामारी के प्रभाव को मापने के लिए एक नए विकसित महासागर प्लास्टिक संख्यात्मक मॉडल का उपयोग किया.

 


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