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“कविताएं” हर हफ्ते : क्या कहती है ‘ डॉ. प्रशांत मुंडेजा’ की कविता “मौसम परिवर्तन” …

Mahendra Kumar SahuJuly 21, 20212min

 

हर कविता हम सब से कुछ ना कुछ कहती जरूर है। हर कविता का हमारे जीवन में कोई ना कोई असर ज़रूर पड़ता है और ये हम सब बखूबी जानते है। बहुत से कवियों को अपने पढ़ा होगा, उनकी कविताओं को महसूस किया होगा। तो इस बार “कविताएं” हर हफ्ते” में हम आपके लिए लाए है ‘ डॉ. प्रशांत मुंडेजा ‘ की लिखी कविता “मौसम परिवर्तन”

 

 

“मौसम परिवर्तन”

दुषित वायु के कारण उषा की शीतल बयार बहनी बंद हुई,

दोपहर की उड़ती धूल हुई कम, एकाएक बदल गया मौसम।

महुआ और कच्ची केरी की सुगंध जंगल में कहीं खो गई,
जब से वातावरण में छा गया घना अंधेरा,
रोशनी आंखों की मध्यम हो गई।

जीवन में क्या परिवर्तन आया, जिंदगी थोड़ी नहीं बहुत कम हो गई।

धरती और आकाश दोनों पर संक्रमण का प्रभाव सघन हो गया,
यूं लगे चिड़ियों एवं छोटे पक्षियों से रिक्त गगन हो गया।

मानसून उल्टी दिशा में छा रहा है, छःगः से अब केरल की ओर जा रहा है ।

न जाने मेघ कौन सी यात्रा पर निकल गए अंबर में ,
कुछ विचित्र चित्र उभरने लगे नीलांबर में ।

उम्मीद की कश्ती आंधी में हिल रही है ,
लेकिन आत्मविश्वास की कली हर दिल में बखूबी खिल रही है।

लगता है पहले वाले खूबसूरत दिन फिर से कदम बढ़ाते चले आएंगे,
अंधेरे में डूबे हुए लाखों रसोईघर, रेस्तरां और हजारों उदास पड़े कल कारखाने एक नई रोशनी के स्पर्श से चमक जाएंगे।।।

डॉ. प्रशांत मुंडेजा

 

 

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