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EXCLUSIVE : कभी जार्ज पंचम फिर महात्मा गांधी और अब राजीव गांधी के नाम से जाना जाता है राजधानी का यह चौक, जाने इसके पीछे की पूरी कहानी

Som dewanganJune 16, 20211min


 

रोहित बर्मन, रायपुर : आज भी इतिहास के पंन्नों में दर्ज कई महत्वपूर्ण बातें आपको शायद ही पता है. राजधानी रायपुर का कोना कोना अपनी अलग पहचान के लिए जाना जाता है. राजधानी के कई चौक चौराहों की भी अपनी अलग कहानी है, आज जिस चौराहे की हम बात कर रहे हैं, वह चौराहा है नव निर्मित चौक राजीव गांधी चौक. जिसे लोग कभी फायर ब्रिगेड चौक, सुभाष स्टोडिम चौक या अन्य कई नामों से जाना करते थे.

 

आज राजधानी के महापौर ने इसका नव निर्माण कराकर इसे राजीव गांधी चौक नाम दिया है. जिसका कुछ ही दिन पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने वर्चुअल रुप से लोकार्पण किया है. क्या आप इस चौक के पीछे की कहानी जानते हैं, आज हम आपको बताएगें इस शानदार चौक की पीछे की कहानी….

 

गुलाम भारत की बात है, जब देश अंग्रेजों के आधीन था. तब देश के दिल कि रायपुर जो आज छत्तीसगढ़ की राजधानी है रायपुर. यह चौक उस वक्त के ब्रिटिश कमिश्नर जार्ज पंचम के नाम से जाना जाता था. इसका नाम था पंचम चौक. वक्त बीतता गया देश में आजादी की लड़ाईयां लड़ी जाने लगी. तब साल 1920 महात्मा गांधी रायपुर पहुंचे और किसानों के जल सत्याग्रह का समर्थन करने पहुंचे थे. वह गांधी का वह दौर था जब गांधी चलते थे तो उनके सांथ पूरे देश की जनता पीछे पीछे चलने लगती थी. जन सत्याग्रह का वह आंदोलन जो धमतरी में चल रहा था. रायपुर आकर गांधी जिस चौक पर रुककर आंदोलन की तौयारी में जा रहे थे वह था पंचम चौक. लेकिन गांधी के आंदोलन की आग के सांथ लोगों ने चौक को गांधी की याद में गांधी चौक के नाम से बोलने लगे.

 

 

इतिहासकार बतातें हैं कि आज से करीब 100 साल पहले इसी जगह पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कंडेल सत्याग्रह की शुरुआत की थी. यहां से गांधी बड़े जनसैलाब के सांथ आंदोलन पर पैदल निकले थे.. और गांधी के आंदोलन की ताकत इतनी बढ़ी थी कि अंग्रेजो को आखिरकार झुकना पड़ा. और तो और अंग्रेजों ने बंदी बनाए किसानों के जानवरों को छोड़ उन्हें कर्ज मुक्त भी कर दिया था. कहा जाता है कि रायपुर में बनी जार्ज पंचम की मूर्ति को वर्ष 1942 में करो या मरो आंदोलन में छत्तीसगढ़ के नेता क्रांति कुमार भारती ने जूते का हार पहनाया था. फिर होना क्या था अंग्रेजो ने क्रांति कुमार को इस अपराध पर जेल में डाल दिया था. इतिहासकार यह भी बतातें है कि इसी चौक में देश की आजादी पर गंगन में तिरंगा लहराया था..

 

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अंग्रेजों के शासन में पहले पंचम चौक, गांधी के आंदोलन के बाद गांधी चौक. फिर समय के साथ साथ नामों पर परिवर्तन हुआ फिर साल 2003 में आधुनिक भारत के मार्गदर्शक व सूचना क्रांति के जनक स्व. राजीव गांधी चौक के नाम से जाना जाने लगा लेकिन वर्तमान में सरकार के सांथ मिलकर रायपुर के महापौर ने एक बार फिर राजीव गांधी चौक का भव्य स्वरुप देने का काम किया है.


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