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EXCLUSIVE : कोरोना ने किया आस्था पर हमला, अंतिम क्षणों में लोगों को रहना पड़ रहा पाप नाशिनी गंगा से वंचित, अंतिम इच्छा भी नहीं हो पा रही पूरी

Priyansha LAZARUSApril 8, 20211min

 



रायपुर।
पूरे देश में कोरोना की लहर चल रही है। जो पहले की अपेक्षा ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है। कोरोना ने जहां लोगों की आर्थिक एवं मानसिक कमर तोड़ दिया है। वहीं लोगों की आस्था पर भी हमला बोला है। हिंदू मान्यता की अगर हम बात करें तो व्यक्ति के अंतिम क्षणों में उसे जमीन पर सुलाया जाता है और धार्मिक ग्रंथों का श्रवण कराया जाता है। साथ ही व्यक्ति को तुलसी पत्ती के साथ गंगा जल का पान कराया जाता है। कोरोना ने सब कुछ खत्म कर दिया है।

 

दरअसल हिन्दू धर्म में गंगा नदी के जल को सबसे पवित्र माना जाता है। गंगा नदी को स्वर्ग की नदी कहा गया है। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं में मृत्यु के समय होने वाली कुछ क्रियाएं भी शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर हिन्दूओं में मृत्यु के समय मरने वाले व्यक्ति के मुंह में तुलसी और गंगाजल डाला जाता है।

 

 

गंगा नदी के विषय में पुराणों में बताया गया है कि यह भगवान विष्णु के चरण से निकली है और शिव की जटा में इनका वास है। इसलिए मृत्यु के समय मुंह में गंगाजल डालने से शरीर से आत्मा निकलते समय अधिक कष्ट नहीं होता है। यह भी मान्यता है कि मुंह में गंगा जल होने से यमदूत नहीं सताते हैं और जीव के आगे का सफर आसान हो जाता है।

मृत्यु के समय गंगा जल के साथ एक और चीज मुह में रखी जाती है वह है तुलसी पत्ता। धार्मिक दृष्टि से तुलसी का बड़ा ही महत्व है। कहते है तुलसी हमेशा श्री विष्णु भगावन के सिर पर सजती है। तुलसी धारण करने वाले को यमराज कष्ट नहीं देते। मृत्यु के बाद परलोक में व्यक्ति को यमदंड का सामना नहीं करना पड़े। इसलिए मरते समय मुंह में तुलसी का पत्ता रखा जाता है।

 

 

वर्तमान में कोरोना से मौत ने जहां लोगों के धार्मिक मान्यताओं पर कुठाराघात तो किया ही है। साथ ही पाप नाशिनी गंगा के पान से भी वंचित कर दिया है। आज कल बड़े बुजुर्ग घरों में यह कहते दिख जा रहे हैं यह कैसा मौत लोगों को मिल रहा है। लोग तुलसी और गंगा जल से भी वंचित रह जा रहे हैं। वहीं अंतिम क्षणों में हर व्यक्ति की इच्छा होता है कि उसके अपने उसके पास रहें। ताकि उसकी प्रकार की कोई इच्छा शेष न रहे। कोरोना ने उनकी यह इच्छा भी अब लोगों से छिन लिया है।

 

 

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