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बीजापुर हमले का मास्टर माइंड है मोस्ट वांटेड नक्सली हिड़मा, जवानों को फसाने ऐसे की थी हमले की प्लानिंग, जानिए आखिर कौन है ये शख्स

Deepak SahuApril 4, 20211min


चंद्रकांत सिंह क्षत्रिय, दंतेवाड़ा : छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में हुये नक्सली हमले का मास्टर माइंड मोस्ट वांटेड नक्सली बस्तर का हिड़मा है। पुलिस के खुफिया विभाग और नक्सल विरोधी ऑपरेशन में शामिल वरिष्ठ अफसरों की मानें तो मोस्ट वांटेड माओवादी नेता रमन्ना जिसके सिर पर 1.4 करोड़ रुपए का इनाम था।

 

 

पुलिस के खुफिया विभाग और नक्सल विरोधी ऑपरेशन में शामिल वरिष्ठ अफसरों की मानें तो मोस्ट वांटेड माओवादी नेता रमन्ना जिसके सिर पर 1.4 करोड़ रुपए का इनाम था की मौत के बाद सुरक्षा बलों को अब उससे भी ज्यादा क्रूर और दुर्दांत नक्सली हिडमा से निपटना पड़ेगा। नक्सलियों द्वारा हमलों की योजना बनाने व उसे अंजाम देने की कमान हिडमा को दे दी जाती है. लिहाजा हिडमा का रमन्ना की जगह लेना नक्सल विरोधी अभियान में लगे अन्य सुरक्षाबलों के लिए अच्छी खबर नहीं है ।

 

लेकिन लगातार उसे ढूढ़ने और खत्म करने की लगातार कोशिशे होती रही मगर फ़ोर्स को अभी तक हिड़मा को पकड़ने या खत्म करने में सफलता नहीं मिल पाई है। कल हुई घटना में भी हिड़मा की तर्रेम इलाके में होने की जानकारी पर ऑपरेशन लॉन्च किया गया था । मगर इसमें फ़ोर्स को सफलता नहीं मिल पाई बल्कि जवान हिड़मा के गैंग एवम एम्बुश में फंस गए ।

 

 

नक्सल विरोधी अभियानों में तैनात वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सीपीआई (माओवादी) केंद्रीय समिति ने हिडमा को स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेसी) का प्रमुख बनाया और हिडमा को छत्तीसगढ़ के पूरे माओवादी बेल्ट में सुरक्षा बलों के खिलाफ हमलों की योजना बनाने और उसे अंजाम देने की सैन्य कार्रवाई का जिम्मा सौंपा गया है

 

हिड़मा पर छतीसगढ़ पुलिस ने 50 लाख का इनाम रखा है.कल हुई घटना में नक्सलियों ने टीसीओसी यानी टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैम्पेन(TCOC) के तहत यह हमला किया है. जिसमें उनका मकसद होता है कि ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा बलों पर हमला कर उन्हें नुकसान पहुँचाये।

 

 

आखिर कौन है हिड़मा

शनिवार को सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ की घटना हिड़मा के गांव के करीब हुई है। हिड़मा को संतोष उर्फ इंदमुल उर्फ पोडिय़ाम भीमा जैसे कई और नामों से भी जाना जाता है। कद-काठी में छोटे से दिखने वाले हिड़मा नक्सलियों के नेतृत्व की काबिलियत के कारण ही सबसे कम उम्र में माओवादियों की टॉप सेंट्रल कमेटी का मेम्बर बन गया है।

 

बस्तर में कई नक्सली हमलों को अंजाम देने वाले दुर्दांत नक्सली का जन्म सुकमा जिले के पुवर्ती गांव में हुआ था। यह गांव दुर्गम पहाडिय़ों और घने जंगलों के बीच में बसा हुआ है। हिड़मा के गांव में बीते लगभग 20 सालों से स्कूल नहीं लगा है। यहां आज भी नक्सलियों की जनताना सरकार का बोलबाला है।

 

 

हिड़मा सिर्फ दसवीं क्लास तक पढ़ा है, लेकिन पढऩे-लिखने में रूचि होने के कारण वह फर्राटेदार अंग्रेजी भी बोल लेता है। बताया जाता है कि हिडमा अपने साथ हमेशा एक नोटबुक लेकर चलता है, जिसमें वह अपने नोट्स बनाता रहता है। हिड़मा की पहचान को लेकर कहा जाता है कि उसके बाएं हाथ में एक अंगुली नहीं है, यही उसकी सबसे बड़ी पहचान है। हिड़मा साल 1990 में माओवादियों के साथ जुड़ा। लेकिन कुछ ही सालों में यह नक्सली संगठनों का एक बड़ा नाम बन गया।

 

साल 2010 में ताड़मेटला में हुए हमले में 76 जवानों की मौत में हिड़मा कि अहम भूमिका थी। साल 2013 में हुए झीरम हमले में भी हिड़मा की अहम भूमिका थी। इस हमले में कई बड़े कांग्रेसी नेताओं सहित 31 लोगों की मौत हो गई थी। साल 2017 में बुरकापाल में हुए हमले में भी हिड़मा की अहम भूमिका बताई गई थी। इस हमले में 25 जवान शहीद हो गए थे।

 

 


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