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नए श्रम कानून के अंतर्गत आपको देना होगा ज्यादा टैक्स, लेकिन PF और ESI में मिलेगा काफी फायदा, जानें कैसे

Sanjay sahuFebruary 21, 20211min


 

नई दिल्ली। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने चार श्रम संहिता (वेज कोड) के तहत नियमों को अंतिम रूप दे दिया है. इससे जल्द ही लागू किए जाने के लिए इनकी अधिसूचना जारी कर सुधारों को वास्तविकता में बदलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है. संसद ने वेतन पर संहिता को 2019 में पारित किया था, जबकि अन्य तीन संहिताओं को दोनों सदनों से 2020 में मंजूरी मिली. मंत्रालय एक बार में सभी चार वेज कोड को लागू करना चाहता है.

नए वेज कोड के बारे में कई बातें हो रही हैं, जैसे कि अब सभी कर्मचारियों के लिए पीएफ और ईएसआई अनिवार्य होगा. कांट्रेक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी पीएफ की सुविधा देनी होगी. यह भी कहा जा रहा है कि नए वेज कोड के लागू होने से हफ्ते में 4 दिन काम करना होगा क्योंकि कानून में एक सप्ताह में 48 घंटे काम का प्रावधान है.

अब ओवरटाइम को लेकर भी प्रावधान किया गया है. नए वेज कोड में सबसे अहम बात है कि इससे टैक्स की देनदारी भी बदलने जा रही है. हो सकता है कि आपको पहले ज्यादा टैक्स देना पड़े.

50 परसेंट से ज्यादा अलाउंस नहीं

अलाउंस के बारे में भी नया नियम बनाया गया है. अब कंपनी बेसिक सैलरी से 50 परसेंट ज्यादा अलाउंस नहीं दे सकती. नया वेज कोड 1 अप्रैल से लागू हो सकता है क्योंकि अब यह सिर्फ नोटिफाई होना बाकी है. सरकार ने राज्य सरकारों के साथ इस विषय में परामर्श का काम पूरा कर लिया है. नए नियम में कंपनियों को सीटीसी को नए सिरे से बनाना होगा. कर्मचारियों की मौजूदा सीटीसी में बड़ा बदलाव होने जा रहा है.

कंपनियां अभी तक बेसिक सैलरी के आधार पर पीएफ या ईएसआई देती रही हैं. इसमें अलाउंस को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया जाता था. अब नए वेज कोड में अलाउंस को बेसिक सैलरी से 50 परसेंट तक रोक दिया गया है. यानी कि अलाउंस बेसिक सैलरी से 50 परसेंट से ज्यादा नहीं हो सकता और इसी आधार पर अब पीएफ और ईएसआई दी जाएगी.

इसका असर टैक्स की देनदारियों पर देखा जा सकता है. अभी तक टैक्स से दो मुख्य अलाउंस एचआरए और एलटीए को बाहर रखा गया है. अब कर्मचारियों की सीटीसी नए सिरे से बनेगी जिसमें बेसिक सैलरी, डीए और रिटेंशन पेमेंट शामिल होगा. पहले के मुकाबले पीएफ और ग्रेच्युटी में ज्यादा पैसा जमा होगा. अब नए वेज कोड में एलटीए और एचआरए बेसिक सैलरी से 50 परसेंट से ज्यादा नहीं रख सकते.

सैलरी का स्ट्रक्चर समझें

इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं, कि कोई कर्मचारी प्रति महीना 50 हजार रुपये सैलरी पाता है तो उसकी बेसिक सैलरी (कुल सैलरी का 40 परसेंट) 2,40,000 रुपये होगी जबकि अलाउंसेस कुल सैलरी का 60 परसेंट 3,60,000 रुपये होता है. कोई व्यक्ति प्रति महीना 75 हजार रुपये सैलरी पाता है तो उसकी सैलरी 3,60,000 रुपये और अलाउंसेस 5,40,000 रुपये होगा. ठीक इसी तरह अगर किसी की सैलरी 1 लाख रुपये है तो उसकी बेसिक सैलरी 4,80,000 रुपये और अलाउंसेस 7,20,000 रुपये होगा.

50 हजार रुपये महीने पाने वाले व्यक्ति की ग्रॉस सैलरी 6 लाख रुपये और नॉन टैक्सेबल अलाउंसेस 3,60,000 रुपये होता है. 75 हजार सैलरी वाले की ग्रॉस सैलरी 9 लाख और नॉन टैक्सेबल अलाउंसेस 5,40,000 रुपये होता है. ठीक उसी तरह 1 लाख रुपये महीना कमाने वाले की बेसिक सैलरी 12 लाख रुपये और नॉन टैक्सेबल अलाउंसेस 7 लाख 20 हजार रुपये होता है.

अब ऐसे बढ़ेगा टैक्स

अब अगर पुराने सिस्टम पर टैक्स की देनदारी की बात करें तो 50 हजार सैलरी वाले व्यक्ति की बेसिक सैलरी 2,40,000 रुपये पर कोई टैक्स नहीं देना होता है. 75 हजार सैलरी वाले की बेसिक सैलरी 3,60,000 रुपये होती है और उसे 5,500 रुपये टैक्स देना होता है. 1 लाख रुपये महीने वाले की बेसिक सैलरी 4,80,000 रुपये होती है और उसे 8,500 रुपये का टैक्स देना होता है. नए वेज कोड के बाद यह पूरा सिस्टम बदल जाएगा. 50 हजार सैलरी वाले की बेसिक (कुल सैलरी का 50 परसेंट) 2,40,000 रुपये होगी और अलाउंसेस (कुल सैलरी का 50 परसेंट) 3 लाख रुपये होगा. 75 हजार पाने वाले के लिए बेसिक 4,50,000 रुपये और अलाउंसेस 4,50,000 और 1 लाख की सैलरी पाने वाले की बेसिक 6 लाख और अलाउंसेस 6 लाख रुपये होगा.

नए वेज कोड में 50 हजार रुपये सैलरी पाने वाले व्यक्ति की 3 लाख की सैलरी पर टैक्स लगेगा और यह राशि 2500 रुपये की होगी, जबकि इस सैलरी वाले लोगों को पहले टैक्स नहीं देना होता था. 75 हजार रुपये सैलरी वाले को 4,50,000 रुपये पर 10 हजार का टैक्स चुकाना होगा. इसी तरह 1 लाख पाने वाले को 6 लाख रुपये की बेसिक सैलरी पर 32,500 रुपये का टैक्स देना होगा. इससे दो तरह की बात होगी. अब सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से कर्मचारियों को ज्यादा फायदा होगा क्योंकि उन्हें पीएफ और ईएसआई ज्यादा मिलेगा. रिटायरमेंट के वक्त उन्हें अच्छा रिटर्न मिलेगा. लेकिन आपकी टैक्स की देनदारी बढ़ जाएगी.


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