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बड़ी खबर : प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में बड़ा घालमेल, अपात्र लोगों के खाते में भेज दिए 1364 करोड़, जानिए अब क्या होगा

Mahendra Kumar SahuJanuary 10, 20211min


 

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में एक बड़ा घालमेल सामने आया है। इस योजना के तहत 20.48 लाख अयोग्य किसानों को पैसे का भुगतान किया गया है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने इन अयोग्य किसानों को प्रति एकड़ 6000 रूपये के हिसाब से 1,364 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। मंत्रालय ने सुचना के अधिकार अधिनियम के तहत लगाए गए आवेदन में यह जानकारी दी है।

 

दरअसल, कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (सीएचआरआई) से संबद्ध आरटीआई आवेदक वेंकटेश नायक ने इस मामले को लेकर कृषि मंत्रालय में सुचना के अधिकार के तहत एक आवेदन किया। जिसमे उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत जानकारी मांगी थी। आवेदन के जवाब में कृषि मंत्रालय ने कहा कि अयोग्य लाभार्थियों की दो श्रेणियों की पहचान की गई है, जिनमें पहले ‘अर्हता पूरी नहीं करने वाले किसान’ हैं, जबकि दूसरी श्रेणी ‘आयकर भरने वाले किसानों’ की है।

इस मामले की जानकारी देते हुए आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक ने बताया कि ‘‘अयोग्य लाभार्थियों में आधे से अधिक (55.58 प्रतिशत) ‘ आयकरदाता’ की श्रेणी में हैं। ‘‘बाकी 44.41 प्रतिशत वे किसान हैं जो योजना की अर्हता पूरी नहीं करते हैं। उन्होंने बताया कि मीडिया में आई खबर के मुताबिक अयोग्य लाभार्थियों को भुगतान की गई राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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नायक ने कहा कि सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के तहत प्राप्त सूचना से पता चलता है कि वर्ष 2019 में शुरू हुई पीएम-किसान योजना के तहत जुलाई 2020 तक अयोग्य लाभार्थियों को 1,364 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. उन्होंने कहा, ‘‘सरकार के अपने आंकड़े संकेत देते हैं कि राशि गलत हाथों में गई। आरटीआई आवेदक ने बताया कि आंकड़ों के मुताबिक अयोग्य लाभार्थियों की बड़ी संख्या पांच राज्यों- पंजाब, असम, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश में है।

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सूचना के मुताबिक, ‘‘पंजाब शीर्ष पर है जहां कुल अयोग्य लाभार्थियों में 23.6 प्रतिशत (यानी 4. 74 लाख) रहते हैं, इसके बाद 16.8 प्रतिशत (3.45 लाख लाभार्थी) अयोग्य लाभार्थियों के साथ असम का स्थान है. अयोग्य लाभार्थियों में 13.99 प्रतिशत (2.86 लाख लाभार्थी) महाराष्ट्र में रहते हैं. इस प्रकार इन तीनों राज्यों में ही अयोग्य पाए गए लाभार्थियों की आधी से अधिक (54.03 प्रतिशत) संख्या रहती है।


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