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प्रशासन ने ग्रामीणों की मांग को किया अनदेखा, श्रमदान से बनाई 7 किलोमीटर सड़क

Mahendra Kumar SahuJanuary 10, 20211min


विप्लब कुंडू, पखांजूर : कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों…! इस कहावत को नक्सल प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों ने चरितार्थ कर दिखाया है हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतागढ़ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम हिरणपाल के ग्रामीणों की। जी हां कांकेर जिला मुख्यालय से महज 60 कि.मी. की दूरी पर स्थिति आमाबेड़ा उपतहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत कोतकुड़ के आश्रित ग्राम हिरनपाल के ग्रामीणों ने मिल कर 5 दिनों में 7 कि.मी. सड़क बना डाली।

 

जिससे ग्रामीणों के आवागमन के लिए कम से कम मोटर साइकिल या साइकिल का आना – जाना संभव हो सके। शासन प्रशासन से कई बार सड़क की मांग ग्रामीणों द्वारा की जा रही थी जब शासन प्रशासन ने नही सुनी तो ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि गांव में लगभग 50 घर है अगर सभी घरों से एक व्यक्ति प्रतिदिन सड़क बनाने में सहयोग प्रदान करेगा। इस निर्णय के चलते ग्रामीणों ने मिलकर सात किमी की सड़क पांच दिनों में तैयार कर ली..

 

ग्रामीणों के 5 दिन में 7 किमी सड़क बनाए जाने का कारण यह है कि आजादी के 73 साल बीत जाने के बाद भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से ग्रामीण वंचित थे। गांव के लिए पहुंचमार्ग नहीं होने से ग्रामीणों को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों को किसी भी कार्य के लिए आमाबेड़ा या अंतागढ़ जाना पड़ता है। इस लिए भी ग्रामीण अपने गांव से सात कि.मी. पैदल चलकर ग्राम पंचायत कोट कुड़ आते हैं फिर वहां से किसी भी साधन से इन स्थानों में पहुंचते हैं ।


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