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6 सबूत और 3 सवाल, 10 बच्चों की मौत का अस्पताल प्रबंधन ही जिम्मेदार… पढ़ें

Mahendra Kumar SahuJanuary 9, 20211min

 


 

मुंबई । महाराष्ट्र के भंडारा जिले के सरकारी अस्पताल में शनिवार तड़के आग लगने से 10 नवजातों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश का दिल दहला दिया बता दे घटना सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में हुई। वही इस पूरी घटना में हॉस्पिटल प्रशासन की गैर ज़िम्मेदारी सामने आती नजर आ रही है। घटना के वक़्त वार्ड में वॉर्ड में 17 बच्चे थे जिसमे से 7 को बचा लिया गया।

 

 

वही अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर प्रमोद खंडाते केने बताया की , “देर रात करीब 2 बजे के हादसा हुआ। न्यूबॉर्न यूनिट से धुआं निकल रहा था। नर्स ने दरवाजा खोला तो देखा कि वॉर्ड पूरा धुआं से भर चूका है उसने तत्काल इसकी जानकारी सीनियर डॉक्टरों को दी जिसके बाद कर्मचारियों ने बच्चों को बाहर निकालना शुरू किया मगर, तब तक 10 मासूमों ने दम तोड़ चूका था। वही 7 बच्चों को बचा लिया गया और उन्हें दूसरे वॉर्ड में शिफ्ट किया गया है।”

 

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इस घटना के बाद जिला कलेक्टर संदीप कदम, SP वसंत जाधव, ASP अनिकेत भारती, सिविल सर्जन डॉक्टर प्रमोद खंडाते मौके पर मौजूद हैं। स्वास्थ्य उप निदेशक संजय जायसवाल भी नागपुर से भंडारा के लिए रवाना हो चुके हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे, कलेक्टर और SP से बात की। उन्होंने घटना की जांच के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। दम घुटने से मरने वाले बच्चों का पोस्टमॉर्टम नहीं किया जाएगा। घटना के पीछे की वजह का पता लगाकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

हॉस्पिटल की लापरवाही :

ड्यूटी पर तैनात नर्स ने बताया – रात 2 बजे सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट का दरवाजा खोला गया तो वहां धुआं था। इससे साफ हो जाता है कि इसके पहले वहां कोई स्टाफ नहीं था।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो, कुछ बच्चों के शरीर काले पड़ गए थे। इसका मतलब ये है कि आग पहले लग चुकी थी। स्टाफ को पता ही नहीं चला।

सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट में रात में एक डॉक्टर और 4 से 5 नर्सों की ड्यूटी रहती है। घटना के वक्त वे कहां थे?

आग लगने की वजह शार्ट सर्किट बताई जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच का नियम है। फिर आग कैसे लग गई?

कुछ परिजनों का आरोप है कि उन्हें 10 दिन से बच्चों से मिलने नहीं दिया गया। नियम के मुताबिक, बच्चे की मां फीडिंग के लिए वहां जा सकती है।

वार्ड में स्मोक डिटेक्टर क्यों नहीं लगा था? इससे आग की जानकारी पहले मिल जाती और बच्चों की जान बच जाती।

 

 


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