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स्कूल VS पालक : कब सुलझेगा मसला? HC के आदेशों पर स्कूलों की मनमानी, प्रदर्शन के अलावा पैरेंट्स क्या ही करें?

Sameer VermaJanuary 8, 20211min


 

रायपुर, नितिन नामदेव : कोरोना काल में शुरू हुए स्कूल संचालकों और पालकों के बीच फीस का मसला अब तक नहीं सुलझ पाया है. एक तो संकटकाल में विद्यालय नहीं खुलने से ऑनलाइन क्लासेज हो रहे हैं, जिससे पालकों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. दूसरी ओर शाला प्रबंधन द्वारा पूरी फीस वसूलने की मनमानी अब सरकार के लिए भी सिर दर्द बनती जा रही है. यही वजह है कि प्रदर्शन का सिलसिला अब तक जारी है.

 

पालकों को समस्या इस बात से है कि न तो स्कूल खुले हैं और न ही कक्षाएं हो रही है. ऑनलाइन क्लास पढ़ाई के लिए उतनी कारगर नहीं है. फिर भी स्कूल मैनेजमेंट पूरी फीस वसूलने पर तुला हुआ है. दूसरी तरफ स्कूल प्रबंधन भी इस बात का हवाला दे रहा है कि उन्हें भी अपने कर्मचारियों को सैलरी देनी है. वह इसका खर्च कहां से निकाले? मामले का पेंच इसका हल निकालने में ही फंसा हुआ है.

 

राजधानी रायपुर के डगनिया स्थित स्वामी विवेकानंद सीनियर स्कूल के इसी मनमानी को लेकर आज पालकों का गुस्सा फूटा. छात्रों को पैरेंट्स ट्यूशन फीस वास्तविक करने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए. पालकों ने शिक्षा विभाग को पत्र भी लिखा है जिसमें उन्होंने ट्यूशन फीस निर्धारित करने की मांग की है.

 

क्या कहना है पालकों का?

पालकों की ओर से संघ के अध्यक्ष विजय शर्मा ने कहा कि स्कूल प्रबंधन के फीस लेने से उन्हें कोई समस्या नहीं है. समस्या इस बात से हैं कि मैनेजमेंट ट्यूशन फीस से ज्यादा पैसे वसूल रही है. जबकि इसपर हाइकोर्ट ने भी रोक लगा रखी है. स्कूल प्रबंधन खुले तौर पर हाइकोर्ट के निर्देशों की अवहेलना कर रही है.

 

उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानंद सीनियर स्कूल ट्यूशन फीस के साथ-साथ मेंटेनेंस, लाइब्रेरी, लैब, स्पोर्ट्स जैसे आदि शुल्क जोड़कर भारी भरकम फीस मांग रहे हैं. जितनी फीस स्कूल प्रबंधन ले रहा है उसका 35 फीसदी ही ट्यूशन फीस के तौर पर पालकों को दिया जाना है. पालकों ने इसका प्रस्ताव भी प्रबंधन को भेजा था जिसे स्कूल संचालक ने मानने से इनकार कर दिया.

 

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अधिकारियों ने साधी चुप्पी

मनमानी का यह मामला कई बार बड़े अधिकारियों तक भी पहुंचा. शिक्षा विभाग के पास ऐसे कई पत्र धूल खाते पड़े हैं जिसमें पालकों ने स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, लेकिन न तो कोई कार्रवाई हुई और न ही मसले का हल निकल सका. मानों शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी मुद्दे पर गंभीर नहीं हैं. या फिर मामला इतना पेचीदा है कि किसकी सुने और किसकी नहीं, अफसरों को यही समझ नहीं आ रहा है.

 

आपको बता दें कि कोरोना काल में स्कूलों के बंद होने के बाद से ही यह समस्या पूरे देशभर में बनी हुई है. छत्तीसगढ़ में भी स्कूलों द्वारा फीस मनमानी को लेकर कई खबरें आई. पालकों ने इसका पुरजोर विरोध भी किया. अंतत: मामले में सरकार को भी दखल देना पड़ा और मुद्दा हाईकोर्ट तक जा पहुंचा. मामले में हाईकोर्ट ने 9 जुलाई को आदेश जारी करते हुए प्रदेश के सभी स्कूलों को ट्यूशन फीस के अलावा अन्य फीस नहीं लेने की बात कही थी. बावजूद इसके स्कूलों की ओर से पूरी फीस मांगी जाए तो पालकों का हल्ला बोल तो लाजमी है.

 

 

 

 

 

 


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