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भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती आज, CM भूपेश ने किया नमन

Sameer VermaDecember 3, 20201min


 

रायपुर : भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की आज 136वीं जयंती है. उनका जन्म बिहार के भोजपुरा क्षेत्र के एक छोटे से गांव में हुआ था. उनकी जयंति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत देश के तमाम नेताओं मंत्रियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. पीएम मोदी ने उन्हें संविधान निर्माण में अतुसलनीय योगदान देने वाला बताया.

 

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा, पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जयंती पर उन्हें मेरी सादर श्रद्धांजलि. स्वतंत्रता संग्राम और संविधान निर्माण में उन्होंने अतुलनीय भूमिका निभाई. सादा जीवन और उच्च विचार के सिद्धांत पर आधारित उनका जीवन देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा.

 

 

 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लिखा, स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भारत रत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी की जयंती पर सादर नमन. वे स्वाधीनता संग्राम के महत्वपूर्ण राजनेताओं में से एक थे. संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में देश को एक मजबूत संविधान देने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

 

 

डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय

बताया जाता है कि राजेंद्र प्रसाद पढ़ाई में अव्वल रहा करते थे. कई बार उनकी कॉपी को देखकर शिक्षक दंग रह जाते थे. एक बार एक परीक्षक ने उनकी कॉपी में लिखा था, कि ये “परीक्षार्थी परीक्षक से बेहतर है”. उनके बारे जो खास बात बतायी जाती है कि वो बेहद सादगी से अपनी जीवन काटना पसंद करते थे. वक्त से सोना, वक्त पर उठना उनके लिए बहुत जरूरी हुआ करता था.

 

 

उन्होंने साल 1915 में लॉ में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की थी. कहा जाता है कि उनके जीवन पर उनके गुरु गोपाल कष्ण गोखले के विचार और महात्मा गांधी ने गहरा प्रभाव डाला था. उन्होंने अपनी आत्मकथा में इस बात का जिक्र भी किया था कि उन्होंने गोपाल कष्ण से मिलने के बाद आजादी की लड़ाई में शामिल होने का फैसला किया था. जिसके बाद वो परिवार की रजामंदी लेकर स्वतंत्रता की लड़ाई में शामिल हुए. बताया जाता है कि महात्मा गांधी खुद राजेंद्र प्रसाद के निर्मल स्वभाव व उनकी योग्यता को लेकर काफी प्रसन्न हुए थे.

पंडित नेहरू से था प्रसाद जी का वैचारिक मतभेद

राजेंद्र प्रसाद जी का नेहरू के साथ मतभेद रहा है. बताया जाता है कि कि साल 1947 में सोमनाथ मंदिर के जोर्णोद्धार का फैसला आया था. जिसका कार्य सन्न 1951 में पूरा कर लिया गया था. जिसके बाद उद्घाटन समारोह में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को बुलाया गया था. लेकिन पंडित नेहरू नहीं चाहते थे कि वो वहां जाये. उनका कहना था कि राष्ट्रपति के वहां जाने से लोगों के बीच गलत संदेश जायेगा. लेकिन इसके बावजूद राजेंद्र प्रसाद उद्घाटन में शामिल हुए.

आपको बता दें, उन्होंने इस उद्घाटन समारोह में कहा था कि, “मैं एक हिंदू हूं. लेकिन इसी के साथ मैं सभी धर्मों का आदर करता हूं.” उन्होंने कहा कि वो कई मौकों पर चर्च, मस्जिद, दरगाह और गुरुद्वारे भी गये हैं. उन्होंने ये बात कह कर लोगों में भाईचारा बनाये रखने का संदेश दिया.


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