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EXCLUSIVE : रायपुर के तीसरी आंख की रोशनी फेल? 970 कैमरों की निगरानी में पूरा शहर, बावजूद बढ़े अपराध

Sanjay sahuNovember 29, 20201min


 

नितिन नामदेव | रायपुर : राजधानी रायपुर में तीसरी आंख होने के बावजूद वारदात में  कमी नहीं आ रही है. आए दिन हत्या, चाकूबाजी, लूट, चोरी, डकैती, सेंधमारी जैसी अप्रिय घटनाएं हो रही है. प्रमुख चौक-चौराहों से लेकर शहर भर में कैमरे लगाए गए हैं. इसके बाद भी अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा है. इसका सीधा कारण हो सकता है कि शहर के भीतर लगे कैमरे ठीक से निगरानी नहीं कर पा रहे हैं.

 

पूरे शहर में लगे हैं 970 कैमरे

 

अपराधों को रोकने व यातायत नियमों का पालन नहीं करने वालों के लिए रायपुर शहर के भीतर 970 कैमरे लगाए गए हैं, लेकिन इतने भारी-भरकम कैमरे लगाने के बावजूद अपराध पर अंकुश लगाने में पुलिस बौनी साबित हुई है. रायपुर में सीसीटीवी कैमरे, पीटीजेड कैमरे, एडाप्टि मैनेजमेंट के कैमरे, रॉन्ग-वे डिटेक्टर कैमरे लगाए गए हैं. यह सभी कैमरे हाई
क्वालिटी के हैं.

 

ऐसी है कैमरों की क्वालिटी

 

शहर के भीतर जितने भी कैमरे लगे हैं वह हाई क्वालिटी से लैस हैं. इससे स्कार्फ, टोपी, बगैर ISI मार्क के हेलमेट लगाकर भागने की कोशिश करने वालों का चेहरा आसानी से पहचाना जा सकता है. सड़कों पर होने वाले अपराधों की रोकथाम में इन हाइटेक सीसीटीवी कैमरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. ऐसे में कैमरों का संचालन ठीक तरह से होना भी जरूरी है.

पीटीजेड कैमरे को रिमोटली ऊपर-नीचे, बाएं या दाएं घूमा सकते हैं. इसे जूम इन और जूम आउट कर सकते हैं. इस कैमरे में आटोमेटिक ऑब्जेक्ट ट्रैकिंग फीचर होता है. इसके सीसीटीवी कैमरे आकार में बड़े होते हैं और इनकी देखने की क्षमता 360 डिग्री होती है.

 

 

आउटर्स में नहीं होती खुफिया निगरानी

 

शहर के प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के बाद आउटर पर खुफिया निगरानी नहीं रखी जा रही है. खासतौर पर नाकेबंदी के प्वाइंट को ही कैमरे की जद में नहीं लिया गया है, जबकि वारदात के बाद अपराधी भागने के लिए इन्हीं रास्तों का इस्तेमाल करते हैं. इस वजह से बैखौफ होकर अपराधी पुलिस से छिप जाते हैं.

 

ये रास्ते अपराधियों के लिए बने सुरक्षित

 

कबीरनगर, गोलचौक, सरोना चौक, महादेवघाट पुल, खम्हारडीह चौराहा और WRS कॉलोनी व भनपुरी का बेहद व्यस्त चौक शामिल है. इनमें से ज्यादातर इलाके चेन स्नेचिंग और लूट के लिए काफी पहले चिन्हित किए जा चुके हैं. सड़क हादसों के लिहाज से भी ये इलाके अहम हैं. कोई भी बड़ी वारदात होने पर इन्हीं इलाकों में ही चेकिंग प्वाइंट भी लगाया जाता है.

 

कई स्थानों पर बिजली बना रोड़ा

 

शहर में कैमरे तो लगाए गए है, लेकिन बिजली कनेक्टिविटी की समस्या भी निकलकर सामने आई है. कहीं बिजली का कनेक्शन नहीं लगाया गया, तो कहीं टेस्टिंग के नाम पर इसे चालू नहीं किया गया. कई स्थानों पर नेटवर्क के चलते कैमरे चालू नहीं किए गए है.

 

कोरोना काल में बढ़े अपराध

 

प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू भी बढ़ते अपराध पर पुलिस अधिकारियों से नाराज थे. उन्होंने कहा था कि कोरोना संक्रमण के दौरान पूरे प्रदेश में लॉकडाउन लगाया गया था. लॉकडाउन के चलते कई लोग बेरोजगार हो गए. कई कंपनियां दस कर्मचारी रखते थे वो अब दो लोगों में ही काम चला रहे हैं. इस बीच लोग घरेलु हिंसा का भी शिकार हुए और अपराध का ग्राफ भी बढ़ा है.

 

क्या बोले ट्रैफिक एएसपी?

 

dsp mandavi

 

इस संबंध में ट्रैफिक एएसपी एसआर मंडावी ने बताया कि रायपुर शहर में 970 कैमरे लगाए गए हैं. लगभग 60 स्थानों पर ट्रैफिक सिग्नल लगे हुए है. इन स्थानों पर सभी प्रकार की निगरानी की जाती है. रॉन्ग-वे व ओवर स्पीड गाड़ी चलाने वालों पर कार्रवाई की जाती है. सिग्नल का पालन नहीं करते है उन पर भी कार्रवाई की जाती है. कैमरो के माध्यम से नो पार्किंग की निगरानी भी की जा रही है. समय समय पर कैमरे की मदद से अपराधियों की पहचान करने में भी सफलता मिली है.


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