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प्रदेश को एक बार फिर जल्द मिलेगा वनभैंसा, नेशनल पार्क से विजिट कर लौटे वन अफसर

Sanjay sahuNovember 21, 20201min

 

रायपुर। छत्तीगढ़ राज्य का राजकीय पशु वनभैंसा का कुनबा बढ़ाने वन विभाग ने एक बार फिर अपनी रफ्तार तेज कर ली है। बताया जा रहा है कि असम स्थित मानस नेशनल पार्क से चार वनभैंसे लाने वन अफसरों का दल एक बार विजिट कर वापस भी लौट आई है। बता दें कि कोरोना काल के दौरान भी असम से वनभैंसा लाया गया था।

 

 

इस बार वन अफसरों की टीम एक साथ नर-मादा समेत चार वनभैंसे लाने की योजना बना रही है। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ पीवी नरसिंग राव के मुताबिक वनभैंसों को लाने के लिए समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है, मगर विभाग की पूरी कोशिश रहेगी कि वनभैंसों को जल्द ही प्रदेश में लाया जाए।

 

 

 

जानकारी अनुसार वनभैंसों का रहवास केंद्र बारनवापारा से लेकर उदंती-सीतानदी के साथ इंद्रावती टाइगर रिजर्व के साथ बस्तर के जंगल रहा है। वर्तमान में उदंती-सीतानदी में एक दर्जन के करीब वनभैंसे हैं, लेकिन इंद्रावती टाइगर रिजर्व में कितने वनभैंसे हैं, इसकी जानकारी वन अफसरों को भी नहीं है।

 

इसकी वजह इंद्रावती का इलाका नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने की वजह से वहां वन्यजीवों की गणना करना वन अफसरों के लिए टेढ़ी खीर है। इसके साथ ही इंद्रावती टाइगर रिजर्व में महाराष्ट्र के वनभैंसों की आवाजाही होती रहती है। कुनबा बढ़ाने कई प्रयोग राजकीय पशु का कुनबा बढ़ाने वन विभाग के साथ शासन स्तर पर कई प्रयोग किए जा रहे हैं।

 

राजकीय पशु का कुनबा बढ़ाने क्लोनिंग करने के साथ कृत्रिम गभार्धान का साहरा लिया गया है। इसके साथ ही अब मानस नेशनल पार्क से वनभैंसे लाकर कुनबा बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। बावजूद इसके जितनी तेजी के साथ वनभैंसों की संख्या जिस गति से बढ़नी चाहिए,वो नहीं बढ़ रही।

 

वही अप्रैल माह में वन विभाग की टीम असम स्थित मानस नेशनल पार्क से एक नर तथा मादा वनभैंसा रेस्क्यू कर उन्हें यहां लेकर आई थी। दोनों वनभैंसों को यहां के प्राकृतिक वातावारण में ढालने के लिए बारनवापारा में अलग से बाड़ा बनाकर रखा गया है।

 

पूर्व में लाए गए वनभैंसों को उदंती-सीतानदी वनभैंसा रेस्क्यू सेंटर में रखना है, इस बात को लेकर विभाग ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है। दोनों वनभैंसों की देखरेख करने अलग से वनकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।


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