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बड़ी खबर: संसदीय समिति के सामने पेश होने से अमेज़न के इनकार को CAIT ने बताया दुस्साहस

Sameer VermaOctober 25, 20201min


 

रायपुर, कुणाल राठी, 25 अक्टूबर 2020 । कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट)के प्रदेश अध्यक्ष अमर परवानी, कार्यकारी अध्यक्ष मंगेलाल मालू, विक्रम सिंहदेव, महामंत्री जितेंद्र दोषी, कार्यकारी महामंत्री परमानंद जैन, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल, प्रवक्ता राजकुमार राठी ने बताया कि आखिरकार वही हुआ जिसका डर था।

 

लंबे समय से देश में विदेशी ई कॉमर्स कंपनियों की बढ़ती मनमानी के खिलाफ कैट आवाज़ उठता रहा है और भारत के रिटेल बाज़ार पर उनकी गलत नीतियों और मन माने रवैये के कारण पड़ते नकारात्मक प्रभाव की ओर विभिन्न फोरम पर ध्यान भी आकर्षित करता रहा है पर बावजूद इसके अभी तक उनपर अंकुश लगाने के लिए कोई ठोस कदम नही उठाये गए और नतीजा ये हुआ कि आब ‘अमेज़न’ जैसी ई कॉमर्स कंपनी ने डाटा प्रोटेक्शन बिल को लेकर संसद की संयुक्त समिति के सामने पेश होने से साफ इनकार कर दिया है।

 

दरअसल समिति ने अमेजन के प्रतिनिधियों से डाटा सुरक्षा के मुद्दे पर 28 अक्टूबर को पेश होने को कहा था। पर जवाब में अमेज़न ने अपनी उपस्थिति से साफ इंकार कर दिया। अमेज़न के इस रवैय्ये को कैट ने एक बड़ा दुस्साहस बताते हुए कहा की इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है क्योंकि अमेज़न एवं अन्य ई कॉमर्स कंपनियां कानूनों को न मानने की आदत में शामिल हैं ! यह कंपनियां खुले रूप से सरकार की एफडीआई पालिसी का उल्लंघन करती आ रही हैं लेकिन क्योंकि इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है इसलिए इनके होंसले बेहद बुलंद हो गए है।

 

 

कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने बताया कि कैट ने अमेज़न और उसके जैसी अन्य विदेशी ई कॉमर्स पोर्टल की अनैतिक कार्य प्रणाली के खिलाफ समय समय पर आवाज़ भी उठाई है। इनकी दबंगई के कारण आज देश के रिटेल सेक्टर के व्यापारी भारी नुकसान झेल रहे है और अगर यही चलता रहा तो उनके सड़क पर आने की नौबत दूर नही है। इन्ही मन माने रवैये पर नकेल कसने के लिए कैट लगातार सरकार से एक मजबूत ई कॉमर्स पालिसी और एक रेगुलेटरी बॉडी के गठन की मांग करता रहा है और मौजूदा हालात में ये अब और भी जरूरी हो गया है। जब अमेज़न जैसी विदेशी कंपनियां हमारे देश के संसद की संयुक्त समिति का सम्मान नही करती है तो आगे क्या होगा इसका अंदाज़ा लगाना ज्यादा मुश्किल नही है। इसलिए कैट एक बार फिर सरकार से इनके इसी गैर ज़िम्मेदाराना रवैये के खिलाफ सख्त करवाई की मांग करता है और सरकार से अनुरोध के करता है कि देश को जल्द से ई कॉमर्स पालिसी की सौगात दी और ई कॉमर्स पोर्टल को मॉनिटर करने के लिए एक रेगुलेटरी बॉडी का गठन करे।


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