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जिला अस्पताल की लापरवाही ने परिवार का जीना किया हराम, अस्पताल में बेटी हुई, लेकिन डिस्चार्ज पर्ची में बता दिया बेटा, अब जन्म प्रमाण पत्र के लिए चक्कर काट रहे परिजन

Sanjay sahuOctober 20, 20201min
children

 


 

छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा का जिला अस्पताल अपनी अव्यवस्था और लापरवाही के लिए हमेशा ही सुर्खियों में बना रहता है। ताजा मामला लावाघोघरी के विजगोरा गांव की यशोदा अनिल घूमल के साथ हुआ है। यशोदा को जिला अस्पताल में 8 अक्टूबर को भर्ती कराया गया था, 10 अक्टूबर को नॉर्मल डिलीवरी में बच्ची का जन्म हुआ, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण डिस्चार्ज पर्ची में फीमेल के स्थान पर मेल लिख दिया गया। अब बच्ची के माता-पिता जन्म प्रमाण पत्र के लिए चक्कर काट रहे हैं।

 

 

अनिल गोयल के मुताबिक पर्ची लेते समय उन्होंने उसे ठीक से नहीं पढ़ा, लेकिन बाद में जब यह गलती सामने आई तो अब यह गलती सुधारने के लिए भटकना पड़ रहा है। इस बारे में प्रभारी सिविल सर्जन डॉ.संगठन ने बताया कि डिस्चार्ज पर्ची में यदि जेंडर चेंज हो गया है तो यह चूक है। अस्पताल प्रबंधन गलती को सुधार कर जन्म प्रमाण पत्र प्रदान करेगा। गौरतलब है कि जिला अस्पताल प्रबंधन लापरवाहियों के चलते हमेशा ही सुर्खियों में रहा है। इससे पहले भी अस्पताल से बच्चा बदलने की शिकायत भी सामने आ चुकी है।

अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र बनाए जाने की वेबसाइट का सर्वर डाउन होने के चलते कई बार हितग्राही महीनों तक चक्कर काटने को मजबूर रहता है। खास तौर पर हर्रई, तामिया, मटका जैसे सुदूर अंचल से आने वाले मरीजों को तो डिस्चार्ज करने के तुरंत बाद प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता है बल्कि कुछ दिनों बाद की तारीख दी जाती है। इस कारण 80 से 100 किलोमीटर दूर तक रहने वाले लोग भटकने को मजबूर हो जाते हैं।


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